धान की फसल बेचने के लिए किसान मंडी पर डेरा डाले हुए है, लेकिन खरीद नहीं हो पा रही है। बृहस्पतिवार को दिनभर कतार में लगने के बाद कुछ किसान रात में मंडी में प्रवेश कर पाए और शुक्रवार सुबह आढ़तियों के आने का इंतजार किया। पहले खरीदे गए धान का उठान न होने के कारण आढ़ितयों ने इन्कार कर दिया। किसानों ने जोर दिया तो दाम गिरा दिया। शुक्रवार को 150 से 200 रुपये कम पर खरीद हुई।
शुक्रवार सुबह चार बजे से पहले ही ट्रैक्टरों की लाइन गेट के बाहर लग गई थी। मंडी में जाम के हालात होने के बाद अंदर प्रवेश करने के लिए भी जद्दोजहद रही। अंदर पहुंच भी गए तो फसल बेचने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
आवक अधिक होने पर व्यापारियों ने धान के रेट कम कर दिए हैं। हाथ से काटे धान की कीमत 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे थे, शुक्रवार को इसकी 2850 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद हुई। खरीद न होने पर करीब 40फीसदी किसान लौट गए।
मशीन से काटे गए धान के दाम 2600 से 2800 रुपये क्विंटल चल रहे थे, शुक्रवार को 2450 से 2600 रुपये पर खरीद हुई। थर्ड ग्रेड धान के रेट 2250 से घटकर 2000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई।
सुबह तीन बजे के आए हुए हैं। गेट के पचास मीटर अंदर ही पहुंच पाए हैं। आगे जाम लगा है। कहीं धान उतारने की जगह नहीं मिल रही। आढ़ती तक पहुंचे तो बात बने। त्योहार पर फसल नहीं बेचेंगे तो कब बेचेंगे। मंडी प्रशासन को व्यवस्था करनी चाहिए।
पंकज, बरामई
बृहस्पतिवार शाम से हम यहां आए हुए हैं। पहले बाहर खड़े हुए थे। रातभर इंतजार करने के बाद सुबह यहां कोई धान खरीदने को तैयार नहीं है। इसलिए वापस लौट रहे हैं। एक हफ्ते पहले अलीगढ़ मंडी में धान बेचा था, तब 3036 रुपये प्रति क्विंटल के रेट मिले थे। अब रेट भी गिरा दिए हैं।
नरेश चौधरी, नगला पतुआ
हार्वेस्टर मशीन से आसान हुई कटाई, खेत में मंडी जल्दी पहुंच रहा धान
अधिक आवक की वजह धान कंबाइन हार्वेस्टर मशीन से कटाई को माना जा रहा है। इसके फसल कटते ही धान सीधे बोरों में पहुंच रहा है और किसान उसे लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं। ज्यादा आवक होने से पहले मथुरा और अलीगढ़ जिले की मंडियां बंद हुईं और अब यही हालत हाथरस मंडी की हो गई है।
माल रखने के लिए जगह नहीं बचने के कारण आढ़ती किसानों को लौटा रहे हैं। मंडी धान से अटी पड़ी है। शुक्रवार को 60000 क्विंटल की आवक हुई, लेकिन खरीद मात्र 22 हजार क्विंटल की हुई। पहले अधिक आवक से अलीगढ़ की खैर व मथुरा की राया मंडी बंद हुई। 14 अक्तूबर को हाथरस में भी आवक बढ़ गई और मंडी के गेट बंद कर देने पड़े। 15 को सुबह सात बजे तक ही ट्रैक्टरों को प्रवेश मिला। हालात थोड़े काबू में आए तो बृहस्पतिवार व शुक्रवार को बढ़ी आवक ने फिर वही स्थिति खड़ी कर दी।
मंडी सचिव गौरव सिंह ने बताया कि मजूदरी व समय बचाने के लिए किसान हार्वेस्टर मशीन का प्रयोग कर रहे हैं। मशीन से एक-एक हफ्ते में होने वाला कटाई का काम कुछ ही घंटों हो जाता है। मंडी में 70 फीसद धान मशीन का आ रहा है। हाथ की कटाई धान केवल 30 फीसदी रह गया है। धान कटते ही किसान ट्रैक्टर में लादकर सीधे मंडी पहुंच रहे हैं।