जिले के अधिकांश किसानों पर केसीसी किसान क्रेडिट कार्ड का बकाया है। यदि वह क्रय केंद्र पर गेहूं बेचते हैं तो उनके खाते में धनराशि पहुंचेगी। बैंक द्वारा कर्ज की धनराशि को काट लिया जाएगा। ऐसे कई कारण हैं, जिनकी वजह से किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने से बच रहे हैं। उनका ज्यादातर गेहूं आढ़तियों के यहां पहुंच रहा है। इसकी वजह वहां तुरंत नकद भुगताना मिला है। यही वजह है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर अभी तक मात्र साढ़े 12 हजार क्विंटल ही गेहूं की खरीद हो सकी है।
उल्लेखनीय है कि शासन स्तर से गेहूं खरीद की लगातार निगरानी की जा रही है। एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी गेहूं खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। अभी तक 700 किसानों ने क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया है, जिसमें से 12 किसानों ने साढ़े 12 हजार क्विंटल गेहूं ही क्रय केंद्रों पर बेचा है। खास बात यह है जिले के अधिकांश किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से कर्ज ले रखा है।
किसानों को डर है कि अगर वह क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचेंगे तो इसका ऑनलाइन भुगतान उनके खातों में पहुंचेगा और बैंक को कर्ज की धनराशि की कटौती करने का मौका मिल जाएगा। अभी तक क्रय एजेंसियों के अधिकारियों ने किसानों से संपर्क तो किसानों ने यही कहा कि अगर नकद भुगतान मिले तो वह क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए तैयार हैं। डिप्टी आरएमओ शिशिर कुमार का कहना है कि जिले में गेहूं की खरीद धीमी गति से चल रही है। अभी तक साढ़े 12 हजार क्विंटल ही गेहूं खरीदा जा सका है।
यदि क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के बाद नकद भुगतान की व्यवस्था की जाए तो बड़ी संख्या में किसान गेहूं लेकर पहुंचेंगे। भुगतान की व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है। तभी किसान ज्यादा गेहूं लेकर केंद्रों पर पहुंचेगा। ऑनलाइन व्यवस्था में देरी से भुगतान होता है।
-वीरपाल, किसान
गेहूं क्रय केंद्र पर बेचने के लिए पहले पंजीकरण करना पड़ता है। उसके बाद गेहूं बेचने के तत्काल बाद भुगतान की व्यवस्था नहीं है। पंजीकरण में कागजी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। यदि गेहूं बेचने में नकद भुगतान की व्यवस्था की जाए तो काफी राहत मिलेगी।
-कन्हैया किसान