फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मौसम की बेरूखी से किसान चिंतित

विज्ञापन
मोरमुकुट, किसान। - फोटो : SADABAD
विज्ञापन
मौसम की बेरूखी से किसान परेशान हैं। हों भी क्यों न, बारिश न होने से नहर तालाब सूखे पड़े हैं तो वहीं बिजली की बेतहाशा कटौती से भी किसान बेहाल हैं। बारिश न होने से खेतों में की गई बुआई भी सूखने लगी है। किसानों को सूखे का डर सता रहा है।
विज्ञापन

श्रावण माह का आधा माह गुजर चुका है, अब तक काफी बारिश हो जाती थी, लेकिन अबकी बार एक दो दिन तेज और रिमझिम बारिश और बूंदाबांदी होकर ही रह गई है। ऐसे में नहर तालाब भी सूखे पड़े हैं तो वहीं निर्धारित 10 घंटे भी बिजली न मिलने से किसानों की फसल मुरझा रही हैं। मौसम की दगाबाजी से किसान चिंतित है। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार मानसून की शुरूआत से ही अच्छी बारिश होगी, जिस वजह से किसानों ने खाद, बीज आदि का इंतजाम कर खेतों की जुताई और बुबाई भी कर दी थी, लेकिन जुलाई का आधा माह से अधिक बीत चुका है और अब तक आधी बारिश भी नहीं हुई है। किसानों की बुआई पर पानी फिर गया है। किसान आसमान की ओर निहार कर थक चुका है, लेकिन बारिश नहीं हो रही है। खेतों में इस समय चरी, वन आदि की फसल प्रभावित हो रही है। बाजरा की बुआई भी सूखने लगी है। ऐसे में किसान बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं। बारिश कम होने से फसलों की बुआई पर खराब असर पड़ रहा है, इन दिनों अधिकतम तापमान फसलों के लिहाज से 25 से 28 डिग्री होना चाहिए, तब तापमान 35 से 40 के बीच चल रहा है। ऐसे में किसानों को तगड़ा झटका लग सकता है।
गत दिनों तप पर बैठ गई थी युवती
बारिश के लिए लोग अब टोने टोटकों का भी सहारा ले रहे हैं। गत दिनों बिसावर क्षेत्र में एक युवती इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए तप पर बैठ गई थी, लेकिन फिर भी इंद्रदेव प्रसन्न नहीं हुए और अभी तक उम्मीद के मुताबिक सादाबाद क्षेत्र में बारिश नहीं हुई है। किसान लगातार आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं, कि आखिर बारिश कब होगी।
विज्ञापन

-श्रावण माह का आधा माह बीत चुका है, लेकिन अभी तक उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई है। ऐसे में खेतों में बोई गई फसल सूख रही हैं। बारिश न पड़ी तो काफी नुकसान हो सकता है। - मोरमुकुट, किसान, गढ़ी अंचा
- हर बार प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ता है, इस बार भी अच्छी बारिश नहीं हो रही है, बादल तो रोज आसमान में छाते हैं, लेकिन बारिश नहीं हो रही है। - छोटेलाल, गढ़ी ख्याली
- बारिश आने का का इंतजार है, निगाहें आसमान की ओर लगी हुई हैं, कि न जाने कब बारिश होगी। बाजरा की बुआई भी सूखी जा रही है। जल्द ही बारिश न हुई तो फसलें बर्बाद हो सकती हैं। - लोचन सिंह, गढ़ी ख्याली

लोचन सिंह, किसान। - फोटो : SADABAD

छोटेलाल, किसान। - फोटो : SADABAD

बारिश नहीं होने के कारण सूखी खेत में चिंता की मुद्रा में बैठे किसान। - फोटो : SADABAD

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें