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सख्त टिप्पणी: झूठे मुकदमे से घटती है कोर्ट की विश्वसनीयता, आरोपी दोषमुक्त, वादी पर केस

Sat, 07 Nov 2026 02:32 AM IST
Chaman Kumar Sharma कमल वार्ष्णेय, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

अदालत ने कहा कि ऐसी स्थितियों से सख्ती से निपटने के लिए ही लैंगिक अपराध से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 की धारा-22 में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सिकंदराराऊ कोतवाली क्षेत्र के पॉक्सो एक्ट के मामले में निर्णय सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम)-प्रथम निर्भय नारायण राय ने न्यायपालिका और कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग पर तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के कृत्यों से समाज में न्यायालय की विश्वसनीयता को गहरी क्षति पहुंचती है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल निजी स्वार्थ या उद्देश्यों की पूर्ति के लिए झूठे मुकदमे दर्ज कराना और अदालत को माध्यम बनाकर कानूनी प्रक्रिया का माहौल खड़ा करना न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।

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न्यायालय ने पांच नवंबर को दिए अपने निर्णय के पैरा 29 में रेखांकित किया कि मामले के वादी (पीड़िता के पिता) और खुद पीड़िता ने पहले पुलिस और मजिस्ट्रेट के समक्ष बयानों में घटना का समर्थन किया, लेकिन अदालत में आकर अपने बयानों से पूरी तरह मुकर गए।

अदालत ने इसे न्यायिक और कानूनी कार्यवाही का अपने निहित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जानबूझकर किया गया दुरुपयोग करार दिया। कोर्ट ने कहा कि अदालत का मुख्य उद्देश्य जहां एक ओर वास्तविक दोषी व्यक्तियों को दंडित करना है, वहीं दूसरी ओर उन लोगों को भी सजा मिलना आवश्यक है, जो सोचे-समझे तरीके से न्यायिक प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करते हैं।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 22 का हवाला
अदालत ने कहा कि ऐसी स्थितियों से सख्ती से निपटने के लिए ही लैंगिक अपराध से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 की धारा-22 में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। चूंकि पीड़िता का पिता एक वयस्क व्यक्ति है और इस मामले में पीड़ित नहीं है, इसलिए उसने केवल अभियुक्त को अपमानित करने और अपने निजी उद्देश्यों के तहत झूठा मुकदमा दर्ज कराया। इसी आधार पर न्यायालय ने वादी के विरुद्ध धारा 22 पॉक्सो एक्ट के तहत प्रकीर्ण वाद दर्ज कर नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

अभियुक्त को किया दोषमुक्त
सिकंदराराऊ कोतवाली में 19 जनवरी को एफआईआर दर्ज करात हुए वादी ने कहा था कि उनकी 17 वर्षीय बेटी को जसवीर सिंह 13 जनवरी को बहला-फुसलाकर शादी की नीयत से ले गया था। पुलिस ने विवेचना के पश्चात आरोपी के विरुद्ध अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाईं और चार्जशीट दाखिल की। पर्याप्त साक्ष्य न होने पर न्यायालय ने जसवीर को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से दोषमुक्त किया है। गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में था। कोर्ट ने अविलंब रिहाई परवाना जेल पहुंचाने के आदेश दिए। अब जसवीर त्योहार पर परिवार के साथ होगा।

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