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Hathras News: 1.63 करोड़ पौधे लगने के बाद भी नहीं बढ़ी हरियाली

Wed, 22 Apr 2026 02:07 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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डीएफओ कार्यालय परिसर में हरियाली। संवाद - फोटो : Samvad
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विनीत चौरसिया
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हाथरस। विश्व पृथ्वी दिवस पर जिले में पर्यावरण संरक्षण की स्थिति चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। पिछले नौ वर्षों में जिले में 1.63 करोड़ पौधे रोपने के बावजूद जिले की हरियाली में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में लगाए गए पौधों में केवल लगभग 10 प्रतिशत के नष्ट होने की बात सामने रखी गई है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है।



पर्यावरण से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में पौधरोपण हुआ है, तो हरित क्षेत्र में स्पष्ट बढ़ोतरी दिखाई देनी चाहिए थी।भारतीय वन सर्वेक्षण की वर्ष 2023 की रिपोर्ट में जिले का हरित आच्छादन मात्र 1.20 प्रतिशत पर ही स्थिर रहा है। वर्ष 2025 की नई रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि हाल के वर्षों में स्थिति में कोई सुधार हुआ है या नहीं।
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जिले में कुल वन क्षेत्र 18.40 वर्ग किलोमीटर दर्ज है, लेकिन इसमें भी 0.92 वर्ग किलोमीटर की कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर सवाल खड़े करती है। जिले से गुजरने वाले कई राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और चौड़ीकरण के लिए पेड़ों के कटान को हरियाली घटने की प्रमुख वजह माना जा रहा है।



सड़कों के विस्तार के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई, जिसकी भरपाई पौधरोपण के बावजूद प्रभावी ढंग से नहीं हो सकी। पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। जब तक पौधों के जीवित रहने की दर नहीं बढ़ेगी, तब तक हरियाली बढ़ाने का लक्ष्य अधूरा ही रहेगा। विश्व पृथ्वी दिवस पर यह जरूरी हो जाता है कि पौधरोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण की ठोस रणनीति बनाई जाए, ताकि आने वाली पीढि़यों को बेहतर और सुरक्षित पर्यावरण मिल सके। संवाद






जनपद में हरियाली अब सिर्फ 1.20 फीसदी

भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट कहती है कि 2020 में वर्ष 2018 के अपेक्षा हरियाली में कोई इजाफा नहीं हुआ है। जारी रिपोर्ट में सामने आया है कि हाथरस में कुल भौगोलिक वन क्षेत्र 1840 वर्ग किलोमीटर का है, जिसमें बहुत अच्छे घनत्व के वन यानि (ऐसा वन क्षेत्र जिसमें आसमान सिर्फ 30 फीसदी या इससे कम दिखाई दे) बिल्कुल नहीं है। वहीं मध्यम घनत्व के वन यानि (ऐसा वन क्षेत्र, जिसमें आसमान 70 फीसदी या उससे कम दिखाई दे) मात्र एक हेक्टेयर है। पूरा खुला हुआ वन क्षेत्र यानि (ऐसा वन क्षेत्र, जहां से पूरा आसमान दिखाई दे) मात्र 22 हेक्टेयर है। वर्ष 2019 की रिपोर्ट में हरियाली क्षेत्र का प्रतिशत मात्र 1.25 बताया गया है। वर्ष 2021 के लिए सामने आई भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट में भी वन प्रतिशत में कोई इजाफा नहीं हुआ है। वर्ष 2023 की रिपोर्ट में हरियाली 1.20 फीसदी पर ठहरी हुई है। वर्ष 2025 की रिपोर्ट आने का अभी इंतजार किया जा रहा है।
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पेड़ों के कटान पर एक नजर
7300 पेड़ काटे गए 530बी मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में।

271 पेड़ काटे जा रहे हैं आगरा-अलीगढ़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए।

250 पेड़ों का कटान हुआ अलीगढ़-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-91 के निर्माण के लिए






प्रदेश में फिर पौधरोपण के लिए लक्ष्य दिया गया है। हाथरस में 19 लाख पौधों का रोपण होना है। लगातार पौधरोपण पर ध्यान दिया जा रहा है। सड़क निर्माण के लिए जिन पेड़ों का कटान हुआ है, उनकी भरपाई में कम से कम पांच वर्ष का समय लगेगा।बावजूद इसके हम हरियाली के 1.20 प्रतिशत पर स्थिर हैं।
-राकेशचंद्र यादव, प्रभागीय वनाधिकारी, हाथरस।
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