दलहन पर मंडी शुल्क से छूट के संंबंध में 20 अप्रैल को शासन ने आदेश दिए थे। एक देश एक कर व्यवस्था के तहत जारी इस आदेश के बाद कई प्रदेशों में दलहन मंडी शुल्क के दायरे से बाहर हो गया, लेकिन प्रदेश में मंडी समितियों ने इस आदेश को अब लागू किया है। इसके तहत जिले के 27 दलहन कारोबारियों पर लगभग 25 लाख का बकाया शुल्क दर्शाया जा रहा है।
दलहन कारोबारियों ने मंडी शुल्क हटाने की मांग लंबे समय तक उठाई थी। अप्रैल 2023 में शासन ने उनकी बात मानते हुए दाल के कच्चे माल को इस शुल्क से मुक्त कर दिया। बावजूद इसके 25 लाख रुपये का बकाया निकालना दलहन कारोबारियों को रास नहीं आ रहा। इसे लेकर दलहन कारोबारियों में रोष है।
उनका कहना है कि शासन की ओर से जब 20 अप्रैल 2023 को आदेश दिया गया तो मंडी समितियों ने इसे छह माह बाद क्यों लागू किया। इस बीच खड़े हुए मंडी शुल्क की देयता उनकी नहीं होनी चाहिए। जो भी मंडी शुल्क बनाया गया है, उसे वापस लिया जाना चाहिए, क्योंकि इसे जानबूझकर लागू करने में देरी करते हुए कारोबारियों पर बकाया निकाला गया है।
गेट पास की अनिवार्यता हो खत्म
दलहन पर मंडी शुल्क से राहत दी गई है। ऐसे में गेट पास आदि बनवाए जाने की अनिवार्यता भी खत्म की जानी चाहिए। कारोबारियों का कहना है कि जब ऑनलाइन पोर्टल पर वह सीधे तौर पर 9 आर भरते हैं तो गेट पास की अनिवार्यता का कोई औचित्य नहीं होता।
दाल मिलों द्वारा खरीदे जाने वाला दलहन यानि कच्चे माल को मंडी शुल्क से 20 अप्रैल को मुक्त कर दिया गया। मंडी समिति इसे छह माह बाद लागू कर रही है, जो अनावश्यक है। हमारे लिए ऑनलाइन पोर्टल पर गेट पास व 9 आर भरने की अनिवार्यता भी है। जब मंडी शुल्क नहीं तो इन्हें भी खत्म करना चाहिए।
-गोविंद प्रसाद अग्रवाल, दाल मिल संचालक
दलहन की खरीद-फरोख्त का ब्योरा ऑनलाइन पोर्टल पर होता है। कारोबारी खुद ही पोर्टल पर इसकी अपलोडिंग करते है। उसके आधार पर आज की तारीख में दलहन कारोबारियों पर लगभग 25 लाख रुपये का बकाया है।
-गौरव सिंह, मंडी सचिव, हाथरस।