कोतवाली पर अपनी पीड़ा लेकर पहुंचे सुखराम व सावित्री। संवाद
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गांव इकबालपुर निवासी 80 वर्षीय सुखराम और उनकी 70 वर्षीय पत्नी सावित्री बेटों और बहुओं की उपेक्षा के कारण बुढ़ापे में दुर्दिन काट रहे हैं। उनको न तो समय से खाना मिल रहा है और न ही इलाज। परेशान दंपती सोमवार को कोतवाली पहुंचे और पूरी व्यथा बताई। पूरा मामला सुनने के बाद पुलिस ने एक बेटे का शांतिभंग में चालान कर दिया।
सुखराम ने पुलिस को बताया कि उनके तीन बेटे हैं। इनमें से सबसे बड़ा पप्पू दिल्ली में काम करता है। दो बेटे अजब सिंह और जितेंद्र सिंह उनके साथ गांव में ही रहते हैं। सुखराम ने अपनी चार बीघा जमीन बेटों को इस आशा से दे दी थी कि वह बुढ़ापे में उनका सहारा बनेंगे, लेकिन विडंबना यह है कि उनकी दोनों पुत्र वधु उनको फालतू मानते हुए उपेक्षा कर रही हैं। न तो उनको समय से खाना मिल रहा है और न ही उन पर कोई ध्यान देता है। उल्टे दोनों पुत्र वधु उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाती हैं। उनकी दिनचर्या में बाधा पैदा करती हैं। बेटे सबकुछ देखने के बाद भी खामोश रहते हैं।
इधर, कुछ समय पूर्व सावित्री ने मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था। सही दिखने लगा तो उन्होंने क्लेश से बचने के लिए चूल्हे पर अपना और पति का खाना बनाना शुरू कर दिया। दुर्भाग्य ने इस पर भी उनका साथ नहीं छोड़ा। लकड़ी उपलों से निकले धुएं से सावित्री को दिखाई देना बंद ही हो गया। अब वह अपना खाना कैसे बनाएं। किसी तरह दोनों मिलकर कच्चा पक्का खाना बनाकर अपने दिन काट रहे हैं।
अब बुजुर्ग दंपती की सबसे बड़ी पीड़ा दिनचर्या में बाधा पहुंचाने को लेकर है। पुलिस ने दोनों की पीड़ा को सुना। इसके बाद जितेंद्र का शांति भंग में चालान कर दिया। पुलिस और दंपती को विश्वास है कि इस कार्रवाई के डर से शायद उनकी दोनों पुत्र वधु ठीक व्यवहार करने लगे और बेटों का दिमाग भी ठिकाने आ जाए। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस पर थाने में आया यह मामला चर्चा में आ गया है।