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Hathras News: हड़ताल से थमी जमीनों की खरीद-फरोख्त

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तहसील परिसर में धरना प्रदर्शन करते दस्तावेज लेखक व  अ​धिवक्ता। संवाद - फोटो : Samvad
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प्रदेश सरकार द्वारा रजिस्ट्री कार्यालय को निजी क्षेत्र के सुपुर्द किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ जिले के अधिवक्ताओं, कातिब संघ (लेखक) और स्टांप वेंडर संघ ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को सभी संगठनों ने तहसील का गेट बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। जिससे पूरे जिले में जमीन की खरीद-फरोख्त ठप हो गई है। सब रजिस्ट्रार जयप्रकाश ने बताया कि हड़ताल से जमीनों की खरीद-फरोख्त बंद है। करीब डेढ़ करोड़ के नुकसान का आकलन किया गया है।
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धरने पर बैठे वक्ताओं ने बताया कि सरकार की मंशा रजिस्ट्री कार्यालय को निजी हाथों में सौंपने की है। सरकार इस व्यवस्था के जरिए हजारों लेखकों, वकीलों और स्टांप वेंडरों को बेरोजगार और बेघर करना चाहती है। जब तक सरकार इस जनविरोधी फैसले को वापस नहीं लेती और सकारात्मक संशोधन नहीं करती, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। गत 4 जून 2025 को जारी किए गए एक शासकीय आदेश के तहत इस निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसका पूरे उत्तर प्रदेश में पुरजोर विरोध किया जा रहा है।
रजिस्ट्री कार्यालयों में कामकाज ठप होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को उठानी पड़ रही है। दूर-दराज के गांवों और बाहरी इलाकों से जमीन की रजिस्ट्री कराने, मुख्तारनामा लिखवाने या अन्य विलेख संबंधी कार्यों के लिए आए लोग दिनभर भटकते रहे। वकीलों और डीड राइटर्स के काम न करने के कारण कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा और लोग बिना काम कराए ही लौटने को मजबूर हो गए। करीब 200 लोगों की जमीन खरीद फरोख्त की प्रकिया नहीं हो सकी। इस मौके पर राकेश चौधरी, भूपेंद्र शर्मा, देवेश दीक्षित, गौरव, नरेश शर्मा, सुदर्शन शर्मा, मदन मोहन गौड़, योगेश पौरुष आदि मौजूद रहे।
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