एडीजे कोर्ट-छह ने 43 साल पुराने अपहरण व हत्या के मामले में आठ पुलिसकर्मियों को दोष मुक्त किया है। वादी ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया था। अभियोजन पक्ष ऐसा कोई सबूत नहीं पेश कर सका, जिससे पुष्टि हो सके कि शव हीरालाल का ही था और पुलिसकर्मियों ने ही उसकी हत्या की थी।
यह था मामला : चंदपा पुलिस ने 5 फरवरी 1983 को एक एनकाउंटर किया था। पुलिस का दावा था कि बड़े बदमाश को मारा है, लेकिन पुलिस मृतक की शिनाख्त नहीं कर सकी थी। मारे गए बदमाश को देखने जब भीड़ पहुंची तो उनमें से गांव बघना के उस समय के प्रधान राजाबाबू ने मृतक की पहचान हीरालाल निवासी अर्जुनपुर के रूप में की।
उन्होंने समाजसेवी व अधिवक्ता रायवीर सिंह को इसकी जानकारी दी। राजाबाबू ने यह भी बताया था कि 5 फरवरी को दिन में वे शांति समिति की बैठक में गए थे। जहां हीरालाल को पठानी सूट, जैकेट, सैंडल व बड़े बालों में चंदपा थानाध्यक्ष के पास बैठा देखा था। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था तो समाजसेवी रायवीर सिंह ने पैरवी की