नींद बिगड़ने से बढ़ी मानसिक परेशानियां
अध्ययन में यह बात सामने आई कि जो पीएचडी विद्यार्थी सोने से पहले लंबे समय तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, उनकी नींद का प्राकृतिक चक्र बाधित हो जाता है। परिणामस्वरूप उनमें अवसाद, चिंता और तनाव के स्तर में वृद्धि देखी गई। खराब नींद और अत्यधिक स्क्रीन टाइम मानसिक स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करते हैं, जिससे व्यक्ति की कार्यक्षमता, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन भी कमजोर पड़ने लगता है।
मानसिक तनाव बढ़ने के साथ शरीर में भी कई बदलाव देखे गए। अवसाद और चिंता से ग्रस्त प्रतिभागियों के रक्त में ऑक्सीजन का स्तर अपेक्षाकृत कम था, जबकि हृदय गति और रक्तचाप अधिक दर्ज किए गए। लगातार खराब नींद और बढ़ता तनाव भविष्य में हृदय रोगों सहित अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
शारीरिक स्वास्थ्य पर भी दिखा असर
मानसिक तनाव बढ़ने के साथ शरीर में भी कई बदलाव देखे गए। अवसाद और चिंता से ग्रस्त प्रतिभागियों के रक्त में ऑक्सीजन का स्तर अपेक्षाकृत कम था, जबकि हृदय गति और रक्तचाप अधिक दर्ज किए गए। लगातार खराब नींद और बढ़ता तनाव भविष्य में हृदय रोगों सहित अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।