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Mango: दशहरी आम पर फिदा हाथरस के खरीदार, मलिहाबाद-लखनऊ का आम बना पहली पसंद, बिक रहा 70 रुपये प्रति किलो

Thu, 25 Jun 2026 12:03 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

इस समय मंडी में बुलंदशहर, अमरोहा, सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों से आम की खेप पहुंच रही है, जिससे कीमतें कम हैं। कई किस्मों से सजे बाजार बाजार में इस समय दशहरी के अलावा चौसा, लंगड़ा, सफेदा और स्थानीय बागों के विभिन्न किस्मों के आम उपलब्ध हैं।
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आगरा रोड पर होती आम की बिक्री - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हाथरस फल मंडी से सब्जी मंडी तक विभिन्न किस्मों के आमों की बहार है। स्वाद, मिठास और खुशबू के मामले में मलिहाबाद और लखनऊ का दशहरी आम पहली पसंद है, जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इसकी कीमत 70 रुपये प्रति किलो है। दूसरी किस्मों के आम की कीमत गुणवत्ता और आकार के अनुसार 20 से 50 रुपये प्रति किलो है।

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फल कारोबारी बताते हैं कि खरीदार स्वाद और गुणवत्ता को देखते हुए अच्छे आम के लिए अधिक कीमत चुकाने को भी तैयार हैं। इस समय मंडी में बुलंदशहर, अमरोहा, सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों से आम की खेप पहुंच रही है, जिससे कीमतें कम हैं। कई किस्मों से सजे बाजार बाजार में इस समय दशहरी के अलावा चौसा, लंगड़ा, सफेदा और स्थानीय बागों के विभिन्न किस्मों के आम उपलब्ध हैं। दशहरी अपनी मिठास और खुशबू के लिए प्रसिद्ध है, जबकि चौसा अपने बड़े आकार, स्वाद और मिठास के कारण पसंद किया जाता है। लंगड़ा आम की मांग भी लगातार बनी हुई है, क्योंकि इसका स्वाद अन्य किस्मों से अलग है।

इस समय मलिहाबाद और लखनऊ का दशहरी आम सबसे ज्यादा बिक रहा है। इसकी मिठास और खुशबू अन्य आमों की तुलना में बेहतर है, इसलिए 70 रुपये किलो तक कीमत होने के बावजूद इसकी बिक्री अच्छी हो रही है। -रामकिशन अग्रवाल, फल विक्रेता।
दशहरी, चौसा, लंगड़ा, सफेदा और तोतापरी समेत कई किस्मों के आम आ रहे हैं। बुलंदशहर से भी आम की आवक बढ़ी है। भाव 20 से 50 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। ग्राहक इनको पसंद कर रहे हैं।-कैलाशी, फल विक्रेता।

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फुटकर कारोबारियों को फायदा
मंडी से कम कीमत पर खरीदा गया आम छांटकर फुटकर बाजार में बेचा जा रहा है, जिससे फुटकर कारोबारियों को लाभ मिल रहा है। मौसम अनुकूल रहने और आपूर्ति बढ़ने के कारण आने वाले दिनों में आम की उपलब्धता और बढ़ने की संभावना है। कारोबारियों का मानना है कि जुलाई के पहले पखवाड़े तक आवक बनी रहेगी। चौसा और लंगड़ा जैसी देर से आने वाली किस्मों की मांग भी बढ़ेगी।

कभी सासनी के आम का जलवा था
सासनी के नाम से बिकने वाला आम अब लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है। किसी समय में यहां का आम प्रदेश ही नहीं, देश के कोने-कोने में बिकता था। यहां पैदा होने वाले आम की विभिन्न प्रजातियां ख्याति अर्जित कर चुकी हैं। 600 बीघा में फैला चंपा बाग काफी मशहूर था। जिसमें लंगड़ा, चौसा, दशहरी, फजीली जैसी आम की 20 किस्में पैदा होतीं थीं। सासनी के आसपास करीब 80 प्रतिशत भूमि में बागवानी थी, जो अब 20 प्रतिशत से भी कम रह गई है। भूजल स्तर में गिरावट आम की बागवानी कम होने का बड़ा कारण मानी जा रही है।
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