समूह से जुड़ी महिलाएं अपने बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घरेलू खर्च अब स्वयं वहन कर पा रही हैं। नर्सरी से होने वाली आय के चलते समूह की सभी 10 महिलाएं अब लखपति की श्रेणी में आ चुकी हैं।
हाथरस के हसायन विकास खंड की ग्राम पंचायत कलूपुरा में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बेमौसमी सब्जियों की पौध तैयार कर न केवल अपनी आजीविका चला रही हैं, बल्कि सालाना लाखों रुपये की आमदनी भी कर रही हैं। स्वरोजगार की पौध से ये महिलाएं अपने जीवन में खुशहाली ला रही हैं।
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उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गठित रहीम स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इस हाईटेक नर्सरी का संचालन कर रही हैं। करीब 10 वर्ष पहले समूह की अध्यक्ष राजेश कुमारी ने 10 महिलाओं को साथ लेकर नगला कांच में इस नर्सरी की शुरुआत की थी। शुरुआत में सीमित स्तर पर काम हुआ, लेकिन धीरे-धीरे अनुभव और प्रशिक्षण के साथ नर्सरी को हाईटेक स्वरूप दिया गया।
महिलाएं यहां आधुनिक तकनीक से बेमौसमी सब्जियों की पौध तैयार करती हैं। इनमें बैंगन, मिर्च, टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी सहित अन्य सब्जियों की उन्नत किस्में शामिल हैं। इन पौधों की मांग आसपास के गांवों के साथ अन्य जिलों तक रहती है। किसान समय से पहले और अधिक उत्पादन के लिए इन पौधों को खरीदते हैं, जिससे महिलाओं की आय लगातार बढ़ रही है।
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समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि नर्सरी से होने वाली आमदनी से उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां वे घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरों पर निर्भर रहती थीं, अब वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में बराबर की भागीदार बन गई हैं। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घरेलू खर्च अब वे स्वयं वहन कर पा रही हैं। नर्सरी से होने वाली आय के चलते समूह की सभी 10 महिलाएं अब लखपति की श्रेणी में आ चुकी हैं।
महिलाओं को प्रशिक्षण तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया गया, जिससे यह पहला सफल हो सकी। यह नर्सरी अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है और भविष्य में ऐसी और इकाइयों को बढ़ावा दिया जाएगा।- प्रेमनाथ यादव ,उपायुक्त, स्वत: रोजगार, हाथरस