पाले से बचाव के लिए किसान पहले ही खेतों में सिंचाई कर रहे हैं। ऐसे में यदि तेज बारिश हो गई तो आलू की फसल सड़ने का खतरा बढ़ जाएगा। सरसों और गेहूं की फसल पर भी अत्यधिक नमी का प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
मौसम के मिजाज में 23 जनवरी को अचानक आए बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आलू, सरसों और गेहूं की फसल पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। किसानों का कहना है कि अगर ज्यादा बारिश हुई तो फसलों को खासा नुकसान हो सकता है।
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सादाबाद के किसानों का कहना है कि इस समय आलू की फसल संवेदनशील अवस्था में है। पाले से बचाव के लिए किसान पहले ही खेतों में सिंचाई कर रहे हैं। ऐसे में यदि तेज बारिश हो गई तो आलू की फसल सड़ने का खतरा बढ़ जाएगा। सरसों और गेहूं की फसल पर भी अत्यधिक नमी का प्रतिकूल असर पड़ सकता है। किसानों ने बताया कि लगातार बादल छाए रहने और नमी बढ़ने से फसल में रोग लगने की आशंका भी रहती है। किसान लगातार आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
सासनी में बूंदाबांदी ने बढ़ाई किसानों की चिंता
सासनी में बूंदाबांदी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ तो आलू की खोदाई चल रही है तो दूसरी तरफ सरसों की फसल पकी खड़ी है। किसानों का कहना है कि यदि और बारिश हुई तो आलू व सरसों की फसल के खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा। किसान आलू की खोदाई पूरी होने तक मौसम के साफ होने की दुआ कर रहे हैं।