गांव नगला रुद में ढंका आलू का ढेर। संवाद
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जिले में कई जगहों पर शनिवार की सुबह हल्की बूंदाबांदी होने और घने बादल छाए रहने से आलू पैदा करने वाले किसानों की धड़कनें बढ़ गईं। इन दिनों क्षेत्र के अधिकांश गांवों में आलू की खोदाई का कार्य तेजी से चल रहा है। ऐसे में मौसम का बदला मिजाज किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है।
मौसम का रुख देखते ही सुबह किसान अपने खेतों पर पहुंच गए। जिन खेतों में आलू की फसल खोदाई के बाद खुले में पड़ी है, वहां किसानों ने तुरंत बचाव के इंतजाम शुरू कर दिए। कहीं आलू को तिरपाल से ढंक दिया गया तो कहीं मजदूरों की संख्या बढ़ाकर आलू को जल्द से जल्द बोरों में भरकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
किसानों का कहना है कि इस समय यदि तेज बारिश हो जाती है तो खुले में पड़ा आलू भीगने से खराब हो सकता है। इससे आलू की गुणवत्ता पर असर पड़ता है और मंडी में इसका उचित दाम नहीं मिल पाता। कई किसानों ने बताया कि पिछले वर्षों में भी अचानक हुई बारिश से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा था, इसलिए इस बार वे किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते।
खेतों में सुबह से ही हलचल देखने को मिली। ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और मजदूरों की आवाजाही बढ़ गई। खोदाई करने वाली मशीनें लगातार चलती रहीं, ताकि अधिक से अधिक आलू को सुरक्षित निकाला जा सके। कुछ किसानों ने बताया कि वे मौसम विभाग की जानकारी पर भी नजर बनाए हुए हैं और मौसम के अनुसार रणनीति तय कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि तेज बारिश पड़ी तो आलू की खोदाई पर ब्रेक लग सकता है, जिससे करीब आठ से 10 दिन के लिए आलू की खोदाई का कार्य टल सकता है।