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खौफनाक वारदात: घर के बाहर खेल रहे बच्चे, कुत्तों के झुंड ने हमला बोल एक-एक कर चार मासूमों को किया लहूलुहान

Sun, 06 Sep 2026 09:39 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

बिना किसी उकसावे के कुत्ते मासूमों पर हमलावार हो गए। कुत्तों ने एक-एक कर चारों बच्चों को काटकर लहूलुहान कर दिया। किसी का हाथ काटा तो किसी के पैर को मुंह में दबा लिया। जान बचाकर भागे बच्चों को दौड़कर दबोच लिया और घायल कर दिया।  
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कुत्ता काटने के बाद घायलों का सीएचसी पर होता उपचार - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सासनी क्षेत्र के गांव सठिया में रविवार दोपहर एक खौफनाक वारदात सामने आई। घर के बाहर खेल रहे चार मासूम बच्चों को कुत्तों के झुंड ने हमला कर घायल कर दिया। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने बमुश्किल कुत्ते को भगाकर मासूमों की जान बचाई। घटना के बाद से गांव में दहशत और पंचायती राज विभाग की लापरवाही को लेकर आक्रोश व्याप्त है।

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गांव सठिया निवासी मुकेश की चार वर्षीय बेटी इच्छा, कन्हैया लाल (6) बेटी लक्ष्मी, विजयपाल का 5 वर्षीय बेटा शिवा और मोहनलाल की ढाई वर्षीय बेटी वर्तिका रविवार दोपहर अपने घर के बाहर एक साथ खेल रहे थे। इसी दौरान करीब पांच कुत्ते वहां आ गए। बिना किसी उकसावे के मासूमों पर हमलावार हो गए। कुत्ते ने एक-एक कर चारों बच्चों को काटकर लहूलुहान कर दिया। किसी का हाथ काटा तो किसी के पैर को मुंह में दबा लिया। जान बचाकर भागे बच्चों को दौड़कर दबोच लिया और घायल कर दिया।  

अचानक हुए हमले से मौके पर चीख-पुकार मच गई। बच्चों के रोने और चिल्लाने की आवाज सुनकर परिजन और आसपास के लोग तुरंत दौड़े। ग्रामीणों ने लाठी-डंडे दिखाकर किसी तरह कुत्ते को वहां से खदेड़ा। मौके पर पहुंची एंबुलेंस की मदद से सभी घायल बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र  सासनी पहुंचाया गया। मामले की जानकारी देते हुए सीएचसी सासनी पर तैनात डॉक्टर शुभम कुमार ने बताया कि कुत्ते के काटने से घायल होकर आए चारों बच्चों का तत्काल प्राथमिक उपचार किया गया है। सभी बच्चों को एंटी-रैबीज वैक्सीन लगा दी गई है। वहीं जख्म पर एंटी रेबीज सीरम भी डाला गया है। फिलहाल सभी की हालत खतरे से बाहर है।
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जिला पंचायत राज विभाग की लापरवाही से बढ़ा खतरा
गांवों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उन पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी जिला पंचायत राज विभाग की होती है। नियमानुसार पंचायत स्तर पर आवारा व हिंसक कुत्तों को पकड़ने के इंतजाम होने चाहिए, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते ग्रामीण इलाकों में ऐसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आ रही। अधिकारियों की इसी लापरवाही का खामियाजा अब निर्दोष मासूमों को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है। सासनी सीएचसी पर रोजाना 30 से 40 एआरवी लग रही हैं। लोग लगातार कुत्तों के हमलों में घायल हो रहे हैं। 

आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। सठिया में हुई घटना की जानकारी नहीं है। गांव में जाकर आवारा कुत्ते को पकड़ा जाएगा। - बिहारी लाल, एडीओ पंचायत।

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