जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 135 लोग एआरवी इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचते हैं। इसमें कुत्ते, बंदर व अन्य जानवरों के हमले में घायल लोग होते हैं। इनमें से लगभग 50 मरीज पहली वैक्सीन वाले होते हैं। 35 से 40 लोग कुत्तों के हमलों में घायल हुए होते हैं। पिछले एक महीने में 1023 लोग कुत्तों के शिकार हुए, जो जिला अस्पताल व इमरजेंसी में पहुंचे हैं।
कागजों में है सारी कार्यवाही
सार्वजनिक स्थलों से कुत्तों की संख्या कम करने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। नगर पालिका के एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर का प्रस्ताव भी बोर्ड की बैठक में नहीं रखा गया है। अभी तक इसके निर्माण का पूरा प्रस्ताव भी नहीं बन पाया है।
इन बातों का ध्यान रखें
- कुत्तों के व्यवहार को समझें, उन्हें उकसाएं नहीं।
- कुत्ता पीछे पड़े तो दौड़े नहीं, सुरक्षित स्थान पर रुके।
- छोटे बच्चों को गलियों व पार्कों में अकेला न छोड़ें।
- कुत्ते द्वारा काटने पर साबुन से घाव को धोएं।
- अस्पताल जाकर तत्काल वैक्सीन लगवाएं।