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डॉक्टर्स डे : खुद की जान जोखिम में डाल लोगों को बचाने में जुटे रहे ‘धरती के भगवान’

Thu, 01 Jul 2021 03:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

  • कई सरकारी और कई निजी चिकित्सक भी हो गए थे कोरोना संक्रमित
  • परिवार से बनाई दूरी ताकि मरीजों की सेवा के साथ अपनों को दे सकें सुरक्षा
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doctor - फोटो : istock
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विस्तार
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चिकित्सकों को धरती का भगवान कहा जाता है। कोरोना महामारी के इस काल में चिकित्सकों ने अपना फर्ज बखूबी निभाया है। चिकित्सक खुद अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों को बचाने में लगे हुए हैं। कोविड अस्पतालों में ड्यूटी करने वाले कुछ चिकित्सक तो कई महीने से अपने घर नहीं गए हैं। खुद कई चिकित्सक संक्रमित भी हो गए हैं। 

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इतना ही नहीं मरीजों के उपचार के दौरान जिला अस्पताल के डॉ. संतोष कुमार, डॉ. रमेश, डॉ. नवनीत अरोड़ा सहित कई सरकारी चिकित्सक कोरोना संक्रमित भी हो गए। कई चिकित्सकों के परिजन भी संक्रमित हो गए। नियत अवधि तक आइसोलेट रहने के बाद यह चिकित्सक फिर अपनी ड्यूटी पर आ गए और मरीजों की सेवा में जुट गए। कुछ स्वास्थ्य कर्मी भी इस दौरान संक्रमित हुए।

यह भी चिकित्सकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। इतना ही नहीं शहर के ज्यादातर निजी चिकित्सकों ने भी अपनी ड्यूटी बखूबी निभाई। यह चिकित्सक भी कोरोना संक्रमित हो गए। 
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महीनों से घर नहीं गए सीएमएस, परिजनों से फोन पर ही होती रही बात
बागला जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आईवी सिंह पर कोरोना काल में कई अतिरिक्त जिम्मेदारी आ पड़ी। जिला अस्पताल में तमाम ऐसे मरीज आए, जो कोरोना संक्रमित थे। उन्होंने  जांच के बाद इन्हें कोविड अस्पतालों में भिजवाया।

उन्होंने ओपीडी ड्यूटी भी की और जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी में भी ड्यूटी की। सीएमएस होने की वजह से जिला अस्पताल का प्रशासनिक कार्य तो उन्होंने देखा ही। वह निकटवर्ती जनपद आगरा के रहने वाले हैं। डॉ. आईवी सिंह का कहना है कि वह इन्हीं सब व्यस्तताओं के चलते मार्च 2020 से अपने घर पर केवल एक बार ही जा पाए हैं। फोन पर ही उनकी परिजनों से बात होती रहती है। संवाद

पिता की तबीयत बिगड़ने पर भी नहीं छोड़ी ड्यूटी 
एमडीटीबी अस्पताल में बनाए गए  कोविड एल टू अस्पताल के प्रभारी डॉ. वीरेंद्र सिंह का कहना है पिछले तीन माह से वह अपने घर नहीं जा पाए। वह अलीगढ़ जिले के कस्बा अतरौली के रहने वाले हैं। उनके पिता कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो गए। इस दौरान उन्होंने पहले यहां कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों की सेवा करना जरूरी समझा और परिजनों से फोन पर ही बात करते रहे। उनका कहना है कि तमाम मरीज उनके और अन्य चिकित्सकों के उपचार से सही हो गए और इसमें वह अपनी संतुष्टि महसूस कर रहे हैं। 

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