दिवाली पर हुई आतिशबाजी के बाद दिल्ली पर छाए धुएं ने शनिवार सुबह राजधानी से 140 किलोमीटर दूर बसे हाथरस को भी अपनी चपेट में ले लिया। शहर के चारों ओर अचानक छाई धुंध से शहर के लोग सकते में आ गए। इसे मौसम का बदला मिजाज समझने लगे लेकिन कुछ ही देर में उन्हें कोहरे और धुएं का फर्क समझ आ गया।
धुएं से आंखों मेें पैदा हुई जलन, सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द और घबराहट से परेशान लोग जल्द ही इसके आसमान से छंटने का इंतजार करने लगे लेकिन सुबह से छाया धुआं शाम तक आसमान में डटा रहा।
शहर के लोग इस पसोपेश में थे कि छाई धुंध को कोहरा माने या स्मॉग? इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से बात की गई। बोर्ड के अधिकारियों ने भी लोगों के संदेह को सही बताया। कहा कि यह कोहरा नहीं है, स्मॉग है। जब उनसे यह पूछा गया कि यह स्मॉग यहां कहां से आया तो उन्होंने कहा कि दिल्ली से छंटने वाली धुंध अब धीरे-धीरे आसपास के जिलों को अपनी चपेट में ले रही है। अधिकारियों ने कहा कि सर्दियाें में पश्चिम से पूरब की ओर हवाएं चलती हैं।
दिल्ली से चली हवाएं ही इस स्मॉग को हाथरस तक खींच लाई हैं। दूसरा यह भी कि कोहरे में तापमान गिर जाता है। मौसम में नमी और ठंडक होती है। कोहरे में ओस होती है जो बूंदों के रूप में इकट्ठा हो जाती है। वहीं इस स्मॉग में तापमान बढ़ा हुआ है और कोई नमी भी नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि यह दिवाली के बाद दिल्ली में हुई बेतहाशा आतिशबाजी का असर है। हाथरस की दिल्ली से दूरी ज्यादा नहीं है, इसलिए यहां भी इसका असर दिखाई पड़ रहा है।
यह धुआं आतिशबाजी के कारण जमा हुआ है। इससे फैले प्रदूषण पर एनजीटी ने नाराजगी जाहिर की है। अगर यह किसी इंडस्ट्री से निकला होता तो बोर्ड कार्रवाई करता लेकिन इस तरह के धुएं को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। इस बारे में तो लोगों को खुद ही सचेत होना होगा कि उनके चलाए पटाखे पर्यावरण, प्रकृति और खुद उनके लिए किस तरह नुकसानदायक हो सकते हैं।
- उमेश कुमार गुप्ता, जेई, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
दिवाली के बाद कई गुना बढ़े प्रदूषण का बुरा असर सेहत पर पड़ सकता है। धुंध के कारण लोगों ने शनिवार को आंखों में जलन, घबराहट, सिरदर्द आदि की शिकायतें कीं। कई ने डॉक्टरों की शरण भी ली। बाल रोग विशेषज्ञ सुनील अग्रवाल के मुताबिक इस तरह के स्मॉग से शरीर को वैसा ही नुकसान पहुुंचता है जैसा धुएं के लगातार संपर्क में रहने पर होता है। इस स्मॉग से शरीर का रेस्पिरेटरी सिस्टम गड़बड़ा जाता है। दमा के रोगियों को सबसे ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है। ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को मास्क लगाकर चलना चाहिए। लोगों को चाहिए कि वह इस दौरान चश्मे का प्रयोग करें। घर से ज्यादा बाहर नहीं निकले। अगर जी घबराने या चक्कर आने की शिकायत हो तो डॉक्टर से संपर्क कर दवा ले लें।
- डॉ. सुनील
वहीं आसमान पर छाई धुएं की चादर से फसलों को भी खतरे का अंदेशा है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके सिंह के मुताबिक कोहरे का फसल पर अपना प्रभाव होता है। अगर यह धुंध एक-दो तक छाई रहती है तो कोई विशेष प्रभाव फसलों पर नहीं पड़ेगा, लेकिन इससे ज्यादा दिनों तक धुआं बना रहने पर सूर्य का समुचित प्रकाश पौधों तक नहीं पहुंचेगा और इससे पौधों की वृद्धि पर बुरा असर पड़ना शुरू हो जाएगा। साफ है कि धुंध का कई दिनों तक छाया रहना फसलों को चौपट कर देगा।