जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने विद्युत विभाग द्वारा रसखान ग्रामीण विकास समिति को भेजे गए डिमांड नोटिस एवं उसके बाद के सभी बिल निरस्त कर दिए हैं।
सासनी क्षेत्र के गांव भोजगढ़ी निवासी रसखान ग्रामीण विकास समिति के सचिव औरंगजेब ने आयोग के समक्ष परिवाद दायर किया। परिवाद में उन्होंने कहा कि समिति के नाम एक विद्युत संयोजन लेने के लिए 30 अप्रैल 2011 को आवेदन किया था। इस पर उन्हें 35.25 केवीए का विद्युत संयोजन स्वीकृत हुआ। उन्होंने कहा कि 27 फरवरी 2015 तक समय से बिल जमा किया। जब उस पर 14 अक्तूबर 2016 को अत्यधिक बिल आया, तब उसने बिल को सही कराने के लिए विभाग से निवेदन किया। इसके बावजूद दो अक्तूबर 2017 को 968022 रुपये का बिल भेज दिया। फिर 15 अक्तूबर 2019 को 11,51,761 रुपये का बिल भेज दिया।
इस मामले में आयोग के समक्ष औरंगजेब ने परिवाद दाखिल किया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष राकेश कुमार, सदस्य कृष्ण प्रभाकर उपाध्याय, रंजना गोयल के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। आयोग ने विभाग द्वारा भेजे गए डिमांड नोटिस एवं उसके बाद के सभी अन्य बिल निरस्त करने का आदेश दिया है। आयोग ने 19 फरवरी 2015 को विद्युत देय शून्य मानते हुए 22 अगस्त 2017 तक की अवधि का नया बिजली बिल बिना किसी ब्याज एवं अधिभार के उस समय लागू दरों के हिसाब से जारी करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में परिवादी की ओर से पैरवी रामकुमार शर्मा एडवोकेट ने की।