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सूखा राहत के नाम पर हाथरस को ठेंगा 

Sat, 16 Apr 2016 11:32 PM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
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हाथरस। बेशक देश भर में सूखे के हालात पर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है और प्रभावित किसानों को तुरंत राहत पहुंचाने का आदेश देश दे चुका है, लेकिन अदालत का आदेश का कोई असर कम से कम इस जिले में तो नजर नहीं आ रहा। लगातार दो साल तक इस जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। बावजूद इसके किसानों को सूखा राहत के नाम पर फूटी कौड़ी शासन से नहीं मिली है, जबकि कई बार जिला प्रशासन के अफसर इस बारे में शासन से पत्राचार भी करते रहे हैं, लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ हासिल नहीं हुआ। हालात इतने खराब हैं कि सूखा पीड़ित किसान को इस वर्ष फसल की बुवाई-सिंचाई भी कर्ज लेकर करनी पड़ी है। किसान कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। उसे इस फसल से काफी उम्मीदें हैं। अगर इस बार भी कुदरत ने धोखा दे दिया तो किसान भूखो मरने के कगार पर पहुंच जाएंगे।
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60 फीसदी से ज्यादा फसल हुई थी बर्बाद
किसानों को ओलावृष्टि से हुए नुकसान में भी सरकार ने मुआवजा देने की घोषणा तो की, लेकिन जिले में अब भी 50 प्रतिशत से अधिक किसान इस मुआवजे से वंचित हैं। जिले में सूखे का कहर पिछले दो कृषि वर्षों से किसानों के लिए मुसीबत बना हुआ है। बारिश के अभाव में किसान की 60 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ है। यह स्वीकारोक्ति खुद शासन ने की। तभी तो जिले को लगातार दूसरे साल सूखाग्रस्त घोषित किया गया। 

सब्सिडी में भी कर दी गई कटौती
उम्मीद थी कि सूखे के मारे किसान को शासन से जल्द से जल्द राहत मिलेगी, लेकिन किसान अब तक इंतजार ही कर रहे हैं। शासन से इमदाद के नाम पर कुछ नहीं मिला है। राहत के नाम पर गेहूं बीज पर सब्सिडी दी गई, लेकिन वह भी दिखावा साबित हुई। पहले तो शासन स्तर से इस बीज की कीमत 2,400 रुपये क्विंटल घोषित की गई, जबकि 1,800 रुपये प्रति क्विंटल बीज किसानों को प्राइवेट दुकानों से मिल रहा था। सब्सिडी का पैसा भी किसानों को उनके खातों में दिया जाना था। यह पैसा कब तक किसानों को मिलेगा, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। यही वजह है कि किसानों ने शासन की इस दिखावटी योजना के प्रति कोई रुचि ही नहीं दिखाई। सिर्फ 40 प्रतिशत के आसपास ही किसानों ने यह बीज प्राप्त किया।
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-सूखा राहत में किसानों को मुआवजा देने के लिए शासन से कोई योजना नहीं हैं, जबकि ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से बर्बाद गेहूं की फसल का जैसे-जैसे पैसा मिल रहा है, उसका वितरण किया जा रहा है।
-केहरी सिंह, एसडीएम सदर

10 करोड़ की भेजी गई थी डिमांड
सूखा राहत योजना में जिले से करीब 10 करोड़ रुपये की मांग शासन को भेजी गई थी, लेकिन अभी तक योजना में एक भी पैसा नहीं दिया गया है। साल 2015-16 में कितनी डिमांड भेजी गई थी, इसका ब्योरा फिलहाल प्रशासन के पास भी नहीं है। कुल मिलाकर सूखा राहत योजना के नाम पर जिले के किसानों के साथ अब तक खेल ही होता आया है।

सूखा राहत योजना के प्रस्ताव की तो जानकारी नहीं है, लेकिन ओलावृष्टि पीड़ित किसानों को जरूर शासन से मदद मिल चुकी है। सूखा राहत के लिए भी शासन से पत्राचार किया जाएगा।
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-डीपी सिंह, एडीएम हाथरस
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