हाथरस। ग्राम पंचायतों की लापरवाही ने जिले का बड़ा नुकसान करा दिया। राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान में आदर्श पंचायतों के चयन के लिए जो प्रश्नावली सरकार ने जारी की थी, जिले की किसी भी ग्राम पंचायत ने उसका जवाब ही नहीं दिया। इस अभियान में जिले की कोई ग्राम पंचायत अपनी जगह नहीं बना सकी।अगर योजना में किसी भी जिला, क्षेत्र और ग्राम पंचायत का चयन हो जाता तो उन्हें शासन से अपने क्षेत्र के विकास के लिए लाखों की धनराशि बतौर ईनाम विकास के लिए मिल सकती थी मगर पंचायतों की लापरवाही से जिले ने इस ईनाम से हाथ धो दिया। योजना का मकसद त्रिस्तरीय पंचायतों को सशक्त बनाना था, लेकिन जिले की कोई भी पंचायत इस मकसद पर खरी नहीं उतरी, जबकि आस-पड़ोस के जिलों की कई पंचायतों ने शासन के सवालों का सही जवाब देकर ईनाम पा लिया। शासन ने भी जिले की पंचायतों की इस लापरवाही पर अफसोस जताया है। यह पहला मौका नहीं है, जब केंद्र सरकार की किसी योजना में जिले की पंचायतें पिछड़ी हैं। इससे पूर्व भी संपूर्ण स्वच्छता अभियान में निर्मल गांवों के चयन में यह जिला फिसड्डी ही रहा है। हालांकि पंचायतराज विभाग का दावा है कि इस बार ग्राम पंचायतों को पहले से ही इस योजना में शामिल होने के लिए तैयार किया जाएगा।
इस तरह के सवाल थे प्रश्नावली मेंदरअसल, योजना में पंचायतों के लिए एक प्रश्नावली जारी की गई थी। पंचायतों को इसमें गांव के आर्थिक, सामाजिक विकास के आंकड़ों से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक पर सवालों के जवाब देने थे। इन जवाबों के आधार पर पंचायतों को शासन स्तर से नंबर दिए जाने थे। मार्किंग के आधार पर आदर्श पंचायतों का चयन किया जाना था।
ये सहायता मिलनी थी पंचायतों कोयोजना में ग्राम पंचायतों को आठ लाख, क्षेत्र पंचायतों को 20 और जिला पंचायत को 40 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देने का प्राविधान था। यह पैसा संबंधित पंचायत को विकास के लिए बतौर पुरस्कार उपलब्ध कराया जाता है।
प्रचार की कमी से भी पिछड़ी पंचायतेंयोजना में पंचायतों के पिछड़ने की एक वजह इसके प्रचार-प्रसार की कमी भी रही है। सूत्र बताते हैं कि ज्यादातर पंचायतों को योजना के बारे में ठीक से जानकारी भी नहीं थी। उन्हें यही नहीं पता था कि सवालों के जवाब किस तरह दिए जाने हैं, जबकि कई ग्राम पंचायतों ने जानबूझकर इसकी अनदेखी कर दी।