व्हाट्स एप पर वायरल हो रहा लिंक। स्रोत : सोशल मीडिया
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हाथरस। साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया तरीका अपनाया है। व्हाट्सएप के जरिये लोगों को दो हजार रुपये मिलने का लालच देकर एक संदिग्ध लिंक भेजा जा रहा है। इसको खोलने के बाद फोन हैक होने से दर्ज संपर्कों पर भी अपने आप फर्जी मेसेज पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
साइबर सेल ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। इस साइबर फ्रॉड में लोगों को व्हाट्सएप पर एक मेसेज भेजा जा रहा है। इसमें लिखा है, मुझे लगा था फेक है, पर सच में दो हजार रुपये मिल गए, तुम लोग भी ट्राई करो! इसके साथ एक संदिग्ध लिंक भी दिया जा रहा है। रुपये मिलने के लालच में लोग इस लिंक पर क्लिक कर रहे हैं। इसके बाद उनके मोबाइल से दूसरे लोगों तक भी यही मेसेज पहुंचने लगता है।
अमेरिकी सर्वर पर तैयार हुआ संदिग्ध लिंक
लिंक की तकनीकी जांच में इसके असुरक्षित होने की जानकारी सामने आई है। शुरुआती जांच के अनुसार, इसका डोमेन सर्वर अमेरिका से संचालित हो रहा है। यह लिंक पांच महीने पहले ही बनाया गया है और इतने कम समय में यह मकड़ जाल की तरह लोगों के मोबाइल में फैल चुका है। आशंका है कि साइबर अपराधी इस तरह के लिंक के माध्यम से मोबाइल का डाटा चुराने और फोन का एक्सेस हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। लिंक पर क्लिक करने के बाद फोन के संपर्कों में दर्ज नंबरों पर अपने आप मेसेज पहुंचने से यह लिंक तेजी से फैल रहा। परिचित के नंबर से मेसेज आने के कारण लोग लिंक खोल भी रहे हैं।
लिंक खोलते ही खतरे में निजी जानकारी
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के फर्जी लिंक फिशिंग और मालवेयर के जरिये मोबाइल की निजी जानकारी हासिल करने के लिए तैयार किए जा सकते हैं। इनके माध्यम से बैंकिंग संबंधी जानकारी, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील डाटा चोरी होने का खतरा रहता है। हालांकि, इस मामले में लिंक क्लिक करने के बाद मोबाइल का पूरा नियंत्रण साइबर अपराधियों के हाथ में जाने की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
साइबर सेल और तकनीकी विशेषज्ञ मामले की जांच में जुटे हैं। लोगों को सलाह दी जा रही है कि व्हाट्सएप पर रुपये मिलने या किसी इनाम का लालच देने वाले अनजान लिंक पर क्लिक न करें। यदि किसी परिचित के नंबर से भी ऐसा संदेश आए तो पहले संबंधित व्यक्ति से फोन पर इसकी पुष्टि कर लें। संदिग्ध लिंक को आगे भेजने से बचें और मोबाइल में किसी तरह की असामान्य गतिविधि दिखाई देने पर साइबर सेल को 1930 पर सूचना दें।
-चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी