अपर सत्र न्यायाधीश एवं एफटीसी प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय के न्यायालय ने घर में घुसकर प्राण घातक हमला करने के आरोपी को दोष सिद्ध माना है। न्यायालय ने दोषी को छह साल के कारावास एवं 14 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
कोतवाली सहपऊ में 27 जून,1990 को प्रमोद कुमार गौतम निवासी महरारा ने एक तहरीर दी। इसमें आरोप लगाया कि वह अपनी बहन की बारात विदा कर रहा था। वह अपने घर में शाम करीब 3.30 बजे बैठा था तो बलिया, महेंद्र पुत्र बुधआ निवासी बागबधिक मजरा मेहरारा ने उसके ऊपर जान से मारने की नीयत से फायर किया। हालांकि वह बाल-बाल बच गया। कमरे के अंदर भाग गया और कमरे से उसने अपनी लाइसेंसी बंदूक उठा ली। जब उसने पीछे देखा तो दोनों ही घर के अंदर आ गए। उसने अपनी जान की रक्षा के लिए फायर किया। तो उसकी गोली बलिया के लगी और वह वहीं गिर गया।
महेंद्र ने फायर किया उससे कमरे की दीवालों व फर्स पर छर्रे लगे हैं। बलिया बहुत बड़ा अपराधी है, जिसके ऊपर दर्जनों संगीन केस चल रहे है। वादी की ओर से एडीजीसी एसएस चौहान ने पैरवी की और आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए। इन आरोपों का आरोपियों के अधिवक्ता खंडन नहीं कर सके। मुकदमें के दौरान बलिया की मौत हो गई। जिससे आरोप पत्र से उसका नाम हटा दिया गया। जबकि दोषी महेंद्र को सजा छह साल के कारावास व 14 हजार रुपये अर्थदंड की सुनाई गई।