अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने हसायन क्षेत्र के गांव सराय जरैरा में हुई हत्या के मामले में आठ आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने इन सभी अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 40-40 हजार रुपये काअर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में इन सभी को 10-10 माह का अतिरिक्त कारावास भी भोगना होगा।
वादी पप्पू सिंह निवासी सराय जरैरा ने कोतवाली हसायन पुलिस को एक तहरीर दी थी। इसमें कहा था कि 18 मार्च 2015 को समय सुबह करीब छह बजे वह अपने ट्रैक्टर को लेने के लिए घर से प्लॉट पर गया था। उसके साथ खेत जुतवाने के लिए उसी के गांव का मेग सिंह भी था। एक दिन पूर्व शाम को हुई कहासुनी को लेकर गांव के अजब सिंह, सतेंद्र उर्फ गुर्रा, भूरा, फौरन सिंह, रवीश कुमार, उदयवीर, सुधीर और सुनील समस्त निवासीगण सराय जरैरा गाली-गलौज करते हुए आए। इस दौरान सतेंद्र उर्फ गुर्रा ने तमंचे से मेग सिंह पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी।
जब उसने टोका तो उस पर भी गोली चला दी, जिससे वह घायल हो गया। उसके साथ आए अन्य लोगों ने भी लाठी-डंडा, सरिया और असलहों से मारपीट और फायरिंग की। घायल मेग सिंह ने उपचार के लिए ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। सत्र परीक्षण के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। वादी की ओर से एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय द्वारा रखे गए साक्ष्यों को झुठलाने में आरोपी पक्ष नाकाम रहा। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर धारा 147,148 में अभियुक्तों को दो-दो वर्ष की कैद एवं चार-चार हजार रुपये अर्थदंड, धारा 308 में चार-चार वर्ष की कैद और आठ-आठ हजार अर्थदंड, धारा 323 में एक-एक वर्ष की कैद और एक-एक हजार अर्थदंड, जबकि धारा 302 और एससीएसटी एक्ट में आठों को सश्रम आजीवन कारावास और 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियुक्त सतेंद्र उर्फ गुर्रा को 25 आयुध अधिनियम में अलग से तीन वर्ष के कारावास और तीन हजार रुपये के अर्थदंड की अतिरिक्त सजा सुनाई गई है।