अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एवं विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने जानलेवा हमले और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने के मामले में चार आरोपियों को दोषी माना है। चारों अभियुक्तों को चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास एवं आठ-आठ हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।
न्यायालय ने यह व्यवस्था भी दी है कि अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में चारों अभियुक्तों को चार-चार महीने का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। कोतवाली सादाबाद पुलिस को विष्णु कुमार निवासी मोहल्ला मंदिर वाला सादाबाद द्वारा सौंपी गई तहरीर में आरोप लगाए गए थे कि एक मई 2008 को उनके भतीजे का लगन समारोह का कार्यक्रम था।
उसी कार्यक्रम के निमंत्रण के लिए दूसरा भतीजा राजकपूर अपने मित्र सतीश शर्मा सभासद और संजय निवासी वासरीसाल थाना खंदौली आगरा के साथ समय करीब रात्रि साढ़े आठ बजे अपनी मोटर साइकिल से गया था। उसी समय वहां पहले से मौजूद निसार अहमद ठेकेदार, जिसके हाथ में सरिया थी, वसीम के हाथ में कांच की बोतल, जलालुद्दीन के हाथ में डंडा और नईमुद्दीन के हाथ र्में इंट थी।
यह सभी लोग मिर्जापाड़ा कस्बा सादाबाद के रहने वाले हैं। इन लोगों ने जो राजकपूर से रंजिश मानते थे, इनकी बाइक रोक ली और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए राजकपूर और उनके साथियों पर हमलावर हो गए। राजकपूर को मारने की नीयत से उनके सिर में सरिया और बोतलों से प्रहार किए, जिससे वह बेहोश हो गए।
उन्हें मरा हुआ जानकार यह चारों लोग भाग गए। साथियों द्वारा सूचना देने पर आसपास के लोग और परिजन मौके पर पहुंच गए। जो राजकपूर को लेकर कोतवाली पहुंचे। पुलिस ने उनको उपचार के लिए सीएचसी सादाबाद पर भर्ती कराया। जांच के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। वादी की ओर से पैरवी एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय ने की।
वहीं सिकंदराराऊ के कोतवाली क्षेत्र के गांव डंडेसरी निवासी सरमन के अपहरण मारपीट की रिपोर्ट तीन माह पश्चात अदालत के आदेश पर दर्ज हुई है। रिपोर्ट के अनुसार तीन अगस्त की रात सरमन अपने घर पर था। इसी दौरान एक राजनीतिक पार्टी का झंडा और नीली बत्ती लगी बोलेरा आकर रुकी। उसमें से उतरे लोग समरन को मारपीट कर गाड़ी में डाल कर ले गए।
पूरी रात गाड़ी में सरमन को घुमाया मारापीटा गया और 7 अगस्त को गंगा की कटरी में फेंक दिया गया। वहां से सरमन किसी तरह गांव आया तथा पूरी बात बताई। सरमन के अनुसार चौकी अगसौली पुलिस ने उसके मामले को झूठा करार दिया तथा कोतवाली में उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं होने दी। मजबूरी में उसने अदालत की शरण ली। पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है।