हाथरस। डार्क जोन में नलकूप कनेक्शनों के फर्जीवाडे़ में सिर्फ दो बाबुओं पर गाज गिरने से विद्युत महकमे पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। सवाल उठें भी क्यों नहीं। जांच में जिन इलाकों में यह फर्जी कनेक्शन पाए गए, वहां के क्षेत्रीय अधिकारी और कर्मचारियों पर अभी तक अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की है। कहीं, जांच के बहाने इस मामले को दबाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा।
30 अप्रैल को हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव सलेमपुर में फर्जी नलकूप कनेक्शनों का मामला सामने आया था। मामला विभाग के उच्चाधिकारियाें के संज्ञान में पहुंच जाने के बाद आनन-फानन इस मामले में दो कार्यालय सहायकों को निलंबित भी कर दिया गया था। विभाग ने इसके बाद सलेमपुर क्षेत्र में इसी तरह के फर्जी नलकूप कनेक्शनों की जांच कराई थी, जिसमें जांच टीमों को लगभग 30 फर्जी नलकूप कनेक्शन मिले। इस मामले में 30 उपभोक्ताओं के खिलाफ तो रिपोर्ट दर्ज करा दी गई, लेकिन महकमे के क्षेत्रीय अधिकारी और कर्मचारी पर पांच दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। लिहाजा, अब सवाल उठ रहे हैं कि जब मौके पर नलकूप कनेक्शन चालू मिले हैं, लाइन बनी मिली है, ट्रांसफॉर्मर लगे मिले हैं तो इसके लिए सिर्फ बाबू जिम्मेदार नहीं हो सकते, इसमें क्षेत्रीय अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं तो क्षेत्रीय कर्मचारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यदि कर्मचारियों अधिकारियों के खिलाफ जांचोपरांत ही कार्रवाई की जानी थी तो बिना जांच कराए कार्यालय सहायकों के खिलाफ ही कार्रवाई किस आधार पर की गई।
ग्रामीण क्षेत्र के तीनों विद्युत वितरण खंडों में जांच चल रही है। अभी दो दिन का समय और बाकी है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही पता चलेगा कि कितने फर्जी कनेक्शन और हैं। जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाएगी।
- राकेश वर्मा, अधीक्षण अभियंता हाथरस