अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय के न्यायालय ने किशोरी को बहला फुसलाकर भगाने के एक आरोपी पर लगाया गया दोष सिद्ध माना है। इसे सात साल के कठोर कारावास एवं सात हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
कोतवाली सासनी में किशोरी के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें आरोप था 20 अक्तूबर 2013 की शाम करीब छह बजे उसकी पुत्री जंगल में गई थी। काफी देर तक घर लौटकर नहीं आने पर उसको तलाश किया तो पता चला कि उसकी पुत्री को अमित कुमार निवासी ग्राम अहक थाना जवां अलीगढ़ बहला फुसलाकर उसका अपहरण कर ले गया है। इस संबंध में गांव के ही रामप्रकाश एवं नाहर सिंह ने बताया कि उक्त युवक उसकी पुत्री को एक सफेद रंग की मारुति कार में बैठाकर ले जा रहा था। अंधेरा होने के कारण कार का नंबर ठीक से पहचाना नहीं जा सका।
न्यायालय में सुनावाई के दौरान आरोपी ने उक्त आरोपों से इंकार किया। इसके बाद न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। सुनवाई के दौरान वादी की ओर से एडीजीसी एसएस चौहान ने न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए। जिनका आरोपी के विद्वान अधिवक्ताओं की ओर से खंडन नहीं किया जा सका। जिससे न्यायालय ने आरोपी को आईपीसी की धारा 263 के तहत पांच वर्ष के कारावास एवं दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि धारा 366 में सात वर्ष के कठोर कारावास व पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। निर्णय में प्रावधान किया गया है कि अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। ब्यूरो