न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
हाथरस। जिले का नाम अनाज की कालाबाजारी को लेकर सुर्खियों में आते ही कई अधिकारियों के पांव तले जमीन खिसक गई है। जिले से 1,065 राशन कार्डों से फर्जी तरीके से खाद्यान्न लिया जा रहा था। हालांकि प्रतिमाह खाद्यान्न जारी होने की रिपोर्ट पर कोटेदार, पर्यवेक्षक और विभागीय अधिकारी भी अपनी मुहर लगा रहे थे, लेकिन कभी भी विभागीय अधिकारियों ने इस मामले में गंभीरता नहीं बरती। इस कारण यह मामला शासन स्तर से खुलकर सामने आया।
हालांकि विभागीय अधिकारियों के पास खाद्यान्न नहीं मिलने और कालाबाजारी होने की शिकायतें तो आईं, लेकिन अधिकारियों ने इस मामले में कोई सुनवाई नहीं की। इस कारण कोटेदार अन्य लोगों से मिलकर कालाबाजारी करते रहे। जिले से 1,065 राशन कार्डों के सापेक्ष प्रति कार्ड दो लीटर तेल के हिसाब से 2,130 लीटर मिट्टी का तेल ब्लैक किया जा रहा था। वहीं प्रति कार्ड पर कम से कम दो यूनिटों के हिसाब से 4,260 किलो चावल और 6,390 किलो गेहूं की कालाबाजारी की जा रही थी। यह आंकड़े तो मात्र एक औसत हैं।
इसके अलावा कई कार्डों पर तो तीन और चार यूनिट भी दर्ज हैं। खाद्यान्न को पर्यवेक्षक की देखरेख में वितरण करने वाले रजिस्टर पर भी सही तरीके से वितरण होने की रिपोर्ट लगातार लगती चली आ रही थी। पिछले दिनों सासनी क्षेत्र में 355 बोरे चावल के पुलिस अधिकारियों द्वारा रुदायन रोड से पकड़े गए थे। इससे पहले हाथरस में भी मिट्टी का तेल कालाबाजारी को जाते समय पकड़ा गया था, लेकिन इन मामलों में फाइलों को विभागीय जांच के नाम पर दबा दिया गया।