पीयूष मित्तल महाकाल और रानी के नाम से बैटिंग एप चला रहा था, इसके लिए उसने एजेंट बनाए हुए थे, जो एक हजार रुपये जमा कराकर आईडी और पासवर्ड देते थे। शुरू में 20 से 25 हजार रुपये तक जीत कराई जाती थी। इसके बाद जब खेलने वालों का लालच बढ़ जाता तो पीयूष का खेल शुरू हो जाता। फिर कोई और नहीं जीत पाता। जीतने का लालच देकर यह खेलने वालों को अपने परिचितों से कर्ज दिला देता और कर्ज नहीं चुका पाने वालों से उनकी प्रॉपर्टी का बैनामा करा लेता था।
सामाजिक संस्थान ने पीयूष को हटाया
शहर में लंबे समय से सामाजिक कार्य कर रही निस्वार्थ सेवा संस्थान से पीयूष मित्तल जुड़ा था। यह संस्थान भूखों को भोजन कराने, बीमारों का इलाज और निर्धन कन्याओं की शादी कराता है। पीयूष इसमें सक्रिय सदस्य बन गया था। ठगी में फंसने के बाद पीयूष मित्तल को संस्था से हटा दिया गया है।