फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऑनलाइन गेमिंग एप से ठगी: सदर थाने से हटाई जांच, क्राइम ब्रांच को दी, गिरोह के सदस्यों की तलाश जारी

Wed, 05 Mar 2025 03:39 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

पीड़ित प्रिया शर्मा को कोतवाली पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं था और उन्होंने पुलिस अधीक्षक से इस मामले की जांच कोतवाली सदर पुलिस से न कराकर किसी दूसरे थाने से कराने की मांग की थी। इसके बाद एसपी ने मुकदमे की विवेचना को क्राइम बांच को सौप दी है।
विज्ञापन
सीओ सिटी के पीछे जाता हुआ आरोपी - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ऑन लाइन गेमिंग एप के जरिए लोगों से ठगी करने के मामले की जांच कोतवाली सदर पुलिस से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। इस मामले में गिरफ्तार पीयूष मित्तल के तार कहां-कहां और किससे जुड़े हैं, इसकी जानकारी क्राइम ब्रांच करेगी। गिरोह सदस्यों की तलाश में पुलिस की टीमें जांच भी कर रही है।

विज्ञापन


शहर की घनी आबादी वाले इलाके चूड़ी वाली गली निवासी मिर्च कारोबारी विनोद कुमार मित्तल के पुत्र पीयूष मित्तल को पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग के जरिए लोगों से ठगी करने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। शहर की ही प्रिया शर्मा ने उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में एक हजार से अधिक लोगों से 250 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

एसपी हाथरस चिरंजीव नाथ सिन्हा ने 3 मार्च को इस मामले में हुए लेनदेन की जांच करने के लिए ईडी को भी पत्र लिखा था। 12.50 करोड़ रुपये कीमत के करीब 18 प्रॉपर्टी के बैनामे पुलिस ने बरामद किए थे। पीड़ित प्रिया शर्मा को कोतवाली पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं था और उन्होंने पुलिस अधीक्षक से इस मामले की जांच कोतवाली सदर पुलिस से न कराकर किसी दूसरे थाने से कराने की मांग की थी। इसके बाद एसपी ने मुकदमे की विवेचना को क्राइम बांच को सौप दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

पीयूष मित्तल ने शहर में बनाए हुए थे एजेंट

पीयूष मित्तल महाकाल और रानी के नाम से बैटिंग एप चला रहा था, इसके लिए उसने एजेंट बनाए हुए थे, जो एक हजार रुपये जमा कराकर आईडी और पासवर्ड देते थे। शुरू में 20 से 25 हजार रुपये तक जीत कराई जाती थी। इसके बाद जब खेलने वालों का लालच बढ़ जाता तो पीयूष का खेल शुरू हो जाता। फिर कोई और नहीं जीत पाता। जीतने का लालच देकर यह खेलने वालों को अपने परिचितों से कर्ज दिला देता और कर्ज नहीं चुका पाने वालों से उनकी प्रॉपर्टी का बैनामा करा लेता था।

सामाजिक संस्थान ने पीयूष को हटाया
शहर में लंबे समय से सामाजिक कार्य कर रही निस्वार्थ सेवा संस्थान से पीयूष मित्तल जुड़ा था। यह संस्थान भूखों को भोजन कराने, बीमारों का इलाज और निर्धन कन्याओं की शादी कराता है। पीयूष इसमें सक्रिय सदस्य बन गया था। ठगी में फंसने के बाद पीयूष मित्तल को संस्था से हटा दिया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें