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हाथरस: कोर्ट ने सुनाया फैसला, नाबालिग की सहमति का कोई महत्व नहीं, दुष्कर्म के आरोपी की जमानत खारिज

Thu, 05 Nov 2026 03:52 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

अदालत ने पत्रावली व साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पीड़िता की आयु 17 वर्ष है यानी वह नाबालिग है, इसलिए उसकी सहमति का कानून की नजर में कोई विधिक महत्व नहीं रह जाता।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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हाथरस विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट प्रथम ने नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने, दुष्कर्म करने व गर्भवती करने के मामले में आरोपी हिमांशु यादव की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसल में कहा कि नाबालिग की सहमति का कानून की नजर में कोई विधिक महत्व नहीं है।

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मामला थाना कोतवाली हाथरस जंक्शन क्षेत्र का है। किशोरी के पिता ने दो सितंबर को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि एक सितंबर को उनकी 17 वर्षीय बेटी को हिमांशु यादव बहला-फुसलाकर ले गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ धारा अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पीड़िता स्वेच्छा से गई थी और उसने पुलिस व मजिस्ट्रेट के समक्ष बयानों में आरोपी पर अपहरण या दुष्कर्म का कोई आरोप नहीं लगाया है। दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और मंदिर में शादी कर चुके हैं। विशेष लोक अभियोजक ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि पीड़िता नाबालिग है और चिकित्सीय जांच के अनुसार वह लगभग 19-20 सप्ताह की गर्भवती है।
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अदालत ने पत्रावली व साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पीड़िता की आयु 17 वर्ष है यानी वह नाबालिग है, इसलिए उसकी सहमति का कानून की नजर में कोई विधिक महत्व नहीं रह जाता। अपराध की जघन्यता और गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने अभियुक्त हिमांशु यादव का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।

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