नगर पंचायत सासनी में सीवरेज एवं जल निकासी योजनाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। राज्य दिव्यांग सलाहकार बोर्ड के सदस्य सागर शर्मा की शिकायत पर हुई विस्तृत जांच में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ), जूनियर इंजीनियर (जेई) और एक लिपिक प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं। जिलाधिकारी अतुल वत्स ने जांच रिपोर्ट नगरीय निकाय निदेशालय भेज दी है, जहां से अब शासन स्तर पर कड़े निर्णय की उम्मीद है।
शिकायतकर्ता की अर्जी पर जिलाधिकारी ने एसडीएम सासनी नीरज शर्मा, वरिष्ठ कोषाधिकारी और जल निगम के एक्सईएन की एक संयुक्त जांच कमेटी गठित की थी। जांच में पाया गया कि फर्म मैसर्स दुबे एंटरप्राइजेज द्वारा जमा कराई गई एफडीआर (फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद) फर्जी थी। भारतीय स्टेट बैंक, अलीगढ़ ने लिखित में इसकी पुष्टि की कि ऐसी कोई एफडीआर उनके बैंक द्वारा जारी ही नहीं की गई है।
शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत की गई माप पुस्तिकाओं से भ्रष्टाचार के चौंकाने वाले खुलासे हुए। आगरा मुख्य मार्ग पर नाला निर्माण के कार्य में कागजों पर 130 मीटर की खुदाई दिखाई गई, जबकि पाइप डालने और वैरीकेटिंग की लंबाई 150 मीटर से लेकर 230 मीटर तक दर्ज कर फर्म को भुगतान कर दिया गया। जांच समिति ने भी इस बड़े फर्जीवाड़े को अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया है।
अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
जांच रिपोर्ट के अनुसार, जेई पर आरोप है कि उन्होंने सहायक अभियंता द्वारा माप पुस्तिका में किए गए संशोधनों और कटौतियों को नजरअंदाज कर पुरानी (अधिक) मापों के आधार पर फर्म को लाखों रुपये का अतिरिक्त भुगतान कराया। इससे सरकारी धन की भारी हेराफेरी हुई। त्रिसदस्यीय जांच समिति ने स्पष्ट किया है कि जेई निविदा पत्रावलियों को नियम विरुद्ध तरीके से अपने पास रखना, एफडीआर का सत्यापन न कराना और फर्जी मापों के आधार पर भुगतान की संस्तुति करने के दोषी हैं।
वहीं, तत्कालीन ईओ पर सक्षम स्तर से संशोधित आंगणन की तकनीकी व प्रशासनिक स्वीकृति लिए बिना ही नियम विरुद्ध तरीके से भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आरोप है। लिपिक पर आरोप है कि उसने सहायक अभियंता द्वारा मापों में किए गए संशोधनों को भुगतान पत्रावली में शामिल नहीं किया, जिससे फर्म को अनुचित लाभ पहुंचा।
शिकायतकर्ता असंतुष्ट, तकनीकी जांच की मांग
शिकायतकर्ता सागर शर्मा ने जांच प्रक्रिया से असंतुष्टि जताई है। उनका कहना है कि कमेटी ने तकनीकी जांच नहीं की है, जिसके संबंध में वह मुख्यमंत्री से भी शिकायत करेंगे। अब देखना यह है कि शासन स्तर पर इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।