कागजों में दौड़, खेत में सन्नाटा
कृषि विभाग को इस वर्ष 199 सोलर पंप लगाने का लक्ष्य मिला है। लेकिन अब तक एक भी पंप जमीन पर नहीं उतरा। विभाग के पास 32 आवेदन जरूर आए जिनमें से 14 किसानों ने अंशदान भी जमा कर दिया। फिर भी पंप स्थापना शून्य है। सहपऊ के किसान हरबीर सिंह वर्मा कहते हैं कि ऑनलाइन आवेदन की बात कही जाती है। कई किसानों के पास न स्मार्टफोन है, न तकनीकी जानकारी। साइबर कैफे के चक्कर काटने पड़ते हैं। आवेदन कर भी दिया तो आगे क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं मिलती।
किसान की उम्मीद बनाम सिस्टम की सुस्ती
योजना का मकसद किसानों को सस्ती और स्थायी सिंचाई सुविधा देना है। सोलर पंप लगने से बिजली बिल और डीजल खर्च में राहत मिलती है। लेकिन जब लक्ष्य 199 का हो और उपलब्धि शून्य तो सवाल उठना लाजिमी है। गिजरौली के पास ही रहने वाले एक आवेदनकर्ता बताते हैं कि उन्हें पहले अंशदान जमा कराने के लिए कहा है, फिर नामित कंपनी पंप लगाएगी। उन्होंने पैसा जमा कर दिया लेकिन महीनों से कोई खबर नहीं। उन्होंने अपनी पहचान को छिपाने की शर्त पर कहा कि अगर सच में सोलर पंप लग जाए तो खेती आसान हो जाएगी। लेकिन अभी तो बस सुनने में अच्छा लगता है।
सवाल जो मांग रहे जवाब?
- क्या प्रचार-प्रसार सिर्फ रेडियो और पोस्टर तक सीमित है?
- क्या ऑनलाइन प्रक्रिया ग्रामीण किसानों के लिए जटिल है?
- अंशदान लेने के बाद स्थापना में देरी क्यों?