कांशीराम कॉलोनी के निवासियों का आरोप है कि इन आवासों के निर्माण में ही बेहद घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था, जिससे ये जल्द ही जर्जर हो गए। सभी ब्लॉकों की छतों पर लगीं पानी की टंकियां भी अब टूट चुकी हैं, जिससे पानी का रिसाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कुछ जगहों पर लोगों को मजबूरी में स्वयं ही आवासों की मरम्मत करानी पड़ी है।
नियमित मरम्मत होती तो 35 साल चलते आवास
आवास-विकास परिषद की ओर से तैयार किए जाने वाले आवासों की मियाद करीब 35 साल होती है, लेकिन इसके लिए कई शर्तें होती हैं। इसमें सबसे प्रमुख शर्त यह है कि हर तीन साल बाद इनकी मरम्मत का कार्य कराना होता है, लेकिन पिछले 16 साल में इन आवासों की मरम्मत के लिए कोई काम नहीं कराया गया है।
दिल्ली-आगरा में हो चुके हैं ध्वस्तीकरण के आदेश
दिल्ली व आगरा में सरकार द्वारा आवंटित किए गए आवासों के जर्जर होने पर उनकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए समितियों का गठन किया गया है। समिति की जांच में भी यह बात सामने आई कि ये आवास अब रहने योग्य ही नहीं हैं। वहां ऐसे आवासों के ध्वस्तीकरण के निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। इसके बाद हाथरस में भी कांशीराम कॉलोनी में बने आवासों की अब जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।