इन सरकारी जमीनों का बदला स्वरूप
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि गाटा संख्या 447 (रकबा 0.121 हेक्टेयर) भूमि अभिलेखों में नाली में दर्ज है। इसके अलावा गाटा संख्या 500 (रकबा 0.135 हेक्टेयर) नाली व रास्ते में अंकित है। गाटा संख्या 502 (रकबा 0.069 हेक्टेयर) पोखर में दर्ज है। इनके स्वरूप को बदलकर उस पर पक्की पटरी और इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछा दी गईं। गाटा संख्या 503 (रकबा 0.055 हेक्टेयर) एवं 581 रास्तों के रूप में दर्ज भू-भाग हैं, जिसे कॉलोनी के विकास में उपयोग किया गया है।
बिना स्वीकृति बनाई चहारदीवारी
जांच रिपोर्ट के अनुसार, उक्त सभी सरकारी जमीनों को ग्लोरी गार्डन कॉलोनी की चहारदीवारी के भीतर शामिल कर निजी उपयोग में ले लिया गया। यही नहीं, इस कॉलोनी के निर्माण के बाद भी किसी सक्षम स्तर से आवश्यक वैधानिक विनियमन या अनुमोदन की प्रक्रिया भी पूर्ण नहीं कराई गई।
दोषियों पर शिकंजा कसने की तैयारी
नगर पालिका प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर नजूल भूमि निरीक्षक यशराज शर्मा को निर्देश दिए, जिसके बाद कोतवाली हाथरस गेट में मनोज यादव, मैसर्स वसुंधरा एस्टेट्स व उनके सहयोगियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इस एफआईआर से कॉलोनाइजरों में खलबली मच गई है। कॉलोनी में रह रहे लोग भी परेशान हैं कि कोई बड़ी कार्रवाई न हो जाए।