शहर के घनी आबादी वाली हनुमान गली में भारी मात्रा में अवैध सिक्के बरामद होने का मामला सुर्खियों में आ चुका है। सूत्रों के अनुसार सिक्के केवल व्यापारियों से नहीं बल्कि सीधे बैंक से भी आते थे। इसके अलावा कानपुर, झांसी और जयपुर के डीलर भी संपर्क में थे, जो बड़ी खेप हाथरस पहुंचाते थे।
गौरतलब है कि एक अगस्त की शाम को एसडीएम राजबहादुर ने नयागंज स्थित स्टेशनरी की दुकान से 16 व हनुमान गली स्थित घर से 90 कट्टे बरामद किए थे। कुल 57 क्विंटल वजन के 1, 2 व पांच रुपये के सिक्के बरामद किए गए थे।
पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच चली खींचतान के बाद देर रात नायब तहसीलदार शिवकुमार ने नवीन के खिलाफ तहरीर दी, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी थी। इधर, आरोपी व उसके सहयोगी घटना के बाद से फरार हैं।
जयपुर और कानपुर से कनेक्शन की आशंका
सूत्रों के मुताबिक इस अवैध कारोबार के तार कानपुर (जहां आरबीआई भी है), झांसी और राजस्थान की राजधानी जयपुर से जुड़े हो सकते हैं। आरोपी के करीबी व्यापारियों की मानें तो इन शहरों से सिंडिकेट के रूप में सिक्कों की बड़ी खेप शहर तक पहुंचाई जा रही थी। यहां से व्यापारी सिक्के दिल्ली के खारी बावली पहुंचाता था।
सीधे बैंकों से नए सिक्के आने की चर्चा
आशंका जताई जा रही है कि इन सिक्कों की आपूर्ति में कुछ बैंक कर्मियों व वित्तीय संस्थानों की संलिप्तता है, जिनके जरिये आरबीआई से आने वाले नए सिक्के सीधे अवैध कारोबारियों तक पहुंचाए जा रहे थे।
48 घंटे बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
पुलिस के सीसीटीएनएस साॅफ्टवेयर में सिक्का निर्माण अधिनियम 2011 की धाराएं ही नहीं थीं। इस कारण प्राथमिकी दर्ज होने में देर हुई। एनसीआरबी को किए गए ई-मेल व उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद इस एक्ट को शामिल किया गया। इसके बाद सोमवार शाम को नायब तहसीलदार द्वारा दी गई तहरीर पर नवीन समाधिया के खिलाफ 48 घंटे बाद प्राथमिकी दर्ज हो सकी।
दिल्ली में 2011 में पकड़ी गई थीं सिक्का गलाने वाली भट्ठियां
जनवरी 2011 में दिल्ली पुलिस ने वहां के जौहरीपुर और करावल नगर स्थित दो फैक्टरियों का पर्दाफाश करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। इन फैक्टरियों में मेटल के लिए सिक्के पिघलाए जा रहे थे। सिक्कों को धातुओं की सिल्लियों में बदला जा रहा था।
सिक्के बरामद होने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। प्रकरण में छानबीन शुरू कर दी गई है।
चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी