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सीएम के बजट में हाथरस फिर मायूस

Fri, 12 Feb 2016 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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हाथरस। सीएम द्वारा शुक्रवार को घोषित किए गए पांचवें बजट में हाथरस की झोली खाली रह गई। सीएम ने भले ही अब तक का सबसे बड़ा बजट घोषित किया हो, लेकिन हाथरस के विकास के लिए कोई भी घोषणा अपने बजट में नहीं की, जिससे जिले के लोगों की उम्मींदें धरी रह गईं। 
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प्रदेश स्तर पर तो सीएम ने कई घोषणाएं की, लेकिन क्षेत्रीय स्तर की बात की जाए तो आसपास के जिलों में आगरा और अलीगढ़ को कुछ तोहफे देकर हाथरस को खाली ही छोड़ दिया गया। सीएम के बजट में न तो हाथरस में ओवरव्रिज के संबंध में बजट की कोई घोषणा हुई और न ही ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना की थी उम्मीद पूरी हो सकी। यही नहीं पिछले चार साल से लटके कांशीराम टाउनशिप के प्रोजेक्ट के लिए भी कोई घोषणा नहीं हुई, जबकि हाथरस में एक हजार आवास की टाउनशिप बनकर तैयार है। रेडीमेड गारमेंटस पर वैट पर छूट की मांग भी पूरी नहीं हो सकी। शहर के दाल, हींग, अचार-मुरब्बा, मेटल उद्योग को भी इस बजट में कोई राहत नहीं दी गई। इतना ही नहीं, शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा के मामले में भी हाथरस खाली हाथ रहा। 
बोले उद्यमीबातचीत--सीएम के बजट में स्वास्थ्य व शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया। व्यापार के प्रोत्साहन के लिए भी कुछ विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। कानून व्यवस्था सुदृढ़ हो इसके सशक्तिकरण के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। हाथरस में सड़कों के लिए, नगर विकास के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। -कपिल अग्रवाल, कारोबारी
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दाल इंडस्ट्री के लिए बजट निराशाजनक है। प्रोसेस दाल पर ढाई फीसदी मंडी शुल्क खत्म करने की मांग पुरानी है। इस पर अमल होता तो यूपी में दाल उद्योग को बढ़ावा मिल सकता था और दाल मिलों की बंदी पर रोक सकती थी। अन्य राज्यों में दाल करमुक्त है।-राधेश्याम अग्रवाल, दाल उद्यमी
दिल्ली-एनसीआर पर दवाब कम करने के लिए हाथरस सबसे महत्वपूर्ण प्वाइंट है। यहां आबादी और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने चाहिए थे। अगर आगरा-अलीगढ़ एनएच को यमुना एक्सप्रेस वे से लिंक करने के प्रोजेक्ट को सरकार मान लेती तो निश्चित रूप से इस क्षेत्र को फायदा मिलता।-प्रदीप गोयल, उद्यमी
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