सुहाग की सलामती के लिए महिलाएं करवा चौथ का पर्व मनाती हैं। करवा चौथ पर हर वर्ष चीनी से बने करवे की डिमांड बढ़ रही है। महिलाएं करवा चौथ के दिन चीनी से बने करवों को अपनी मान्यों को दान करती हैं।
यह माना जाता है कि चीनी से बने करवों को दान करने से जीवन में मिठास आती है और परिवार में सुख शांति बनी रहती है। सुहागिनें मिट्टी से बने करवों में जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं तो चीनी से बने करवों में मखाने, किसमिस, बादाम और काजू सहित अन्य मेवा भरकर अपनी सास और जेठानी आदि को मंसती हैं।
चीनी के करवे बाजार में क्रमश: 15, 20 और 25 रुपये के अलग-अलग साइज में बिक रहे हैं। नवविवाहिता महिलाओं का पहला त्योहार होने पर चीनी से बने करवे भेजे जा रहे हैं। शहर के बाजारों में करवों की दुकानें सजी हुई हैं। करवे तैयार कराने के लिए दुकानदार दिन और रात की शिफ्ट में कारीगरों से काम करा रहे हैं।
चीनी से बने करवे को महिलाएं मंसने के लिए अधिक पसंद करती हैं। हर वर्ष चीनी, कोयला, लकड़ी व मजदूरी के पैसे बढ़ने के कारण करवे के मूल्यों में वृद्धि करनी पड़ी है।
- विनोद कुमार, दुकानदार, घंटाघर
करवा चौथ पर हर वर्ष चीनी का करवा दान करती हूं। बाजार से करवा खरीदे हैं। दो-चार रुपये महंगा है पर कोई फर्क नहीं पड़ता। बल्कि करवों की जरूरत हर साल बढ़ती रहती है।
- रानी, गृहणी।
करवा चौथ पर चीनी से बने करवे दान करना विशेष महत्व रखता है। सुना है चीनी का करवा दान करने से परिवार में सुख शांति आती है। हर साल चीनी के करवा मंसती हूं।
- कोमल, गृहणी।
पति की दीर्घायु के लिए 19 अक्तूबर को सुहागिनें करवाचौथ का निर्जल व्रत रखेंगी। इस दिन किए जाने वाले सोलह श्रंगार के लिए महिलाओं में विशेष उत्साह नजर आ रहा है।
महिलाओं ने बाजार से जरूरी सामान के साथ कपड़ों व सौंदर्य प्रसाधन की खरीदारी करना शुरू कर दिया है। बाजारों में सुबह से खरीदारों की चहलकदमी शुरू हो गई। साज शृंगार की वस्तुओं की दुकानों से लेकर साड़ी और रेडीमेड गारमेंटस की दुकानों पर सुबह से देर रात तक महिलाओं की खासी भीड़ रही।
इसके अलावा ब्यूटी पार्लरों पर बुकिंग कराई गई। महिलाओं ने बाजार में सोने के आभूषण तो खरीदे ही वहीं आर्टिफिशियल ज्वैलरी की दुकानों खासा भीड़ नजर आई।