हाथरस की पहचान रंग-गुलाल और होली उत्पादों के बड़े बाजार के रूप में है। यहां तैयार और आयातित दोनों तरह के उत्पादों की अच्छी खपत होनी शुरू हो गई है। इस साल युआन की कीमत बढऩे से उत्पाद भी महंगे हुए है। इससे ग्राहकों की पसंद और बजट पर भी असर पड़ सकता है।-अनुभव अग्रवाल, होली उत्पादों के थोक विक्रेता
हमें हाथरस से माल लेने में ज्यादा आसानी होती है, क्योंकि एक ही काउंटर पर रंग-गुलाल के साथ देश और चीन में बनी पिचकारी, मास्क आदि दिल्ली से भी कम दामों पर उपलब्ध हो जाते हैं।-सतेन्द्र कुमार, एटा निवासी कारोबारी।
हम कुछ साल पहले तक दिल्ली से माल लेते थे। वहां पैकिंग के लिए कार्टून, सूतली आदि तक के दाम देने पड़ते थे, वहां से ट्रांसपोर्ट भी काफी महंगा है, इसलिए हम करीब तीन साल से हाथरस से ही माल की खरीद कर रहे हैं, इस साल माल कुछ महंगा है।-अंकित कुमार, कासगंज निवासी कारोबारी।
बढ़े दामों पर एक नजर
- 10 रुपये वाली पिचकारी के थोक दाम अब 10.80 रुपये।
- 15 रुपये वाली टोपी के थोक दाम अब 16.20 रुपये।
- 50 रुपये वाली पिचकारी अब थोक में 54 रुपये की।
- 20 रुपये वाले मास्क की कीमत अब थोक में 21.60 रुपये।
- 100 रुपये वाले मास्क की कीमत अब 108 रुपये।
- 200 रुपये वाली पिचकारी अब करीब 216 रुपये की।
- 150 रुपये वाले कलरफुल बाल अब 162 रुपये में।