जिला अस्पताल में दवा काउंटर पर लगी भीड़। संवाद
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मई के महीने में सूरज के तीखे तेवर और भीषण गर्मी ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है। इस जानलेवा तपिश और लू का सबसे बुरा असर मासूम बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल में इन दिनों उल्टी, दस्त से पीड़ित बच्चों की तादाद अचानक बेहद बढ़ गई है।
स्थिति यह है कि अस्पताल के बाल रोग विभाग में सुबह से ही बीमार बच्चों को लेकर आने वाले परिजनों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। शुक्रवार को अस्पताल में 1800 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचे।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. प्रमोद कुमार ने बताया कि उमस व लू के कारण बच्चे डायरिया और गैस्ट्रोएंटराइटिस का शिकार हो रहे हैं, इसलिए इस समय बच्चों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। शुक्रवार को करीब 25 बच्चे उल्टी व दस्त के पहुंचे। इनमें से चार को भर्ती किया गया।
डाॅ. प्रमोद ने कहा कि इस मौसम में बच्चों के शरीर में पानी की कमी होना सबसे खतरनाक साबित हो सकता है। अगर बच्चे को एक या दो बार भी उल्टी या दस्त हो, तो तुरंत ओआरएस का घोल पिलाना शुरू करें। यदि घर में ओआरएस उपलब्ध न हो, तो उबले हुए पानी में नमक और चीनी का घोल बनाकर दें। पानी की कमी से ही बच्चे गंभीर स्थिति में पहुंचते हैं।