गजेंद्र ने अपने पिता को पोस्टमैन ऑफिसर बताया और अपनी पत्नी को गृह मंत्रालय में बताया। यह लोग बोले कि आपके फाॅर्म में कमी है। इसको दूर किए जाने के बाद ही आप परीक्षा दे पाओगे। कमी को ठीक कराने के बदले आपको 20 लाख रुपये जमानत के रूप में प्रति व्यक्ति के हिसाब से परीक्षा से जमा करने होंगे। परीक्षा के बाद रुपये वापस कर दिए जाएंगे। नामजदों के कहने पर कुल 36,07,200 रुपये कई लोगोें के फोन पे पर मनोज व गजेंद्र और उनके पिता व पत्नी ने डलवाए।
गजेंद्र ने 18 लाख रुपये अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कराए और 20 लाख रुपये नकद लिए। परीक्षा के बाद रिजल्ट आया और उसके बाद जब इन लोगों से संपर्क किया तो इन लोगों ने पांच जनवरी को एक फर्जी नियुक्ति पत्र धर्मेंद्र कुमार को दे दिया। जब उन्होंने कहा कि यह फर्जी है तो नामजदों ने कहा कि रुपये वापस कर देंगे, लेकिन आज तक रुपये वापस नहीं किए हैं।