बिलखते मृतक विष्णु के परिजन। संवाद
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किसान विष्णु ने अपना ही नहीं दूसरे किसानों से भी आलू खरीदकर पांच कोल्ड स्टोरेज में जमा किया, लेकिन इस बार मंदी है। आलू की कीमत गिरी हुई है और करीब 22 लाख रुपये का घाटा किसान को हो गया। कर्ज के जाल में फंसे किसान पर लेनदारों का तकादा बढ़ने लगा। आखिरकार मुनाफे की चाह में सस्ते आलू का महंगा सौदा जिंदगी पर भारी पड़ गया और हताशा में किसान विष्णु ने शुक्रवार रात को फंदा लगाकर जान दे दी।
गांव नगला रमजू निवासी विष्णु के पिता मूलचंद ने बताया कि इस बार विष्णु ने 10 बीघा खेत में आलू बोया था, जिससे करीब 800 पैकेट (50 किलोग्राम प्रति पैकेट) तैयार हुए। उसने मुनाफे की आस में आलू को व्यापार भी शुरू किया और 3200 पैकेट 500 से 600 रुपये प्रति पैकेट के भाव पर दूसरे किसानों से खरीदे।
पिता के अनुसार विष्णु ने 4000 पैकेट आलू उसने सादाबाद-जलेसर मार्ग स्थित तीन कोल्ड स्टोरेज, खंदौली और आगरा के एक-एक कोल्ड स्टोरेज में रखवाए थे। बाजार में आलू के दाम गिरकर महज 400 रुपये प्रति कट्टा रह गए। इस मंदी से उसे प्रति कट्टे पर 100 से 200 रुपये का सीधा नुकसान हो रहा था। करीब 22 लाख रुपये के भारी नुकसान की आशंका ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था।
तीन दिन पहले गंदे नाले में लगाई थी छलांग
मूलचंद ने बताया कि वह तीन दिन पहले भी विष्णु ने आत्महत्या का प्रयास कर किया था। तब उसने गांव के पास बहने वाले एक गंदे नाले में छलांग लगाई थी। एक ग्रामीण की नजर उस पर पड़ गई, जिसने शोर मचाकर परिजनों और अन्य ग्रामीणों को बुलाया। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद विष्णु को सुरक्षित बाहर निकाला था। इस घटना के बाद से पूरा परिवार सहमा हुआ था। वे लगातार तीन दिनों से विष्णु को समझा-बुझाकर ढाढ़स बंधा रहे थे।
मंदिर प्रसाद खाया और वहीं सो गया था
19 जून 2026 की शाम को विष्णु ने अपने परिजनों से पास के गांव खोंडा स्थित अपने मामा के घर जाने की बात कही। वह वहां चला गया। रात करीब 9:30 बजे उसने अपने ममेरे भाई के साथ गांव के नलकूप के पास बने मंदिर का प्रसाद खाया। इसके बाद दोनों वहीं नलकूप पर सो गए। अगली सुबह उसकी आत्महत्या की खबर मिली। संवाद