क्षेत्र के गांव पल्हावत में सैकड़ों बीघा बाजरे की फसल नष्ट करने के बाद कीड़ों का हमला ऊंचागांव और घाटमपुर तक फैल गया है। शनिवार की सुबह किसान मोरध्वज चौधरी जब अपने खेत पहुंचे तो 15 बीघा में खड़ी बाजरा की फसल लगभग पूरी तरह बर्बाद मिली। किसान राकेश चौधरी की भी 15 बीघा फसल कीड़ों की भेंट चढ़ गई।
सादाबाद क्षेत्र के गांवों में इन दिनों किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। पहले बालों वाली इल्ली और अन्य कीड़ों ने बाजरे की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया, अब यही प्रकोप मक्के की फसल तक पहुंच गया है। ऊंचागांव, घाटमपुर और पल्हावत समेत कई गांवों में किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। किसानों का कहना है कि पहले आलू में नुकसान हुआ और अब बाजरा व मक्का की फसल भी नष्ट हो रही है।
मक्के की फसल को बचाने के लिए किसानों ने महंगे कीटनाशक का छिड़काव किया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। किसान ओमवीर सिंह ने अपनी छह एकड़ मक्के की फसल पर कीटनाशक का प्रयोग किया, फिर भी कीड़े लगातार दाने चट कर रहे हैं। सत्यवीर सिंह ने भी दो बार दवा छिड़की, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। हरि सिंह की आठ बीघा मक्के की फसल लगभग ठूंठ में तब्दील हो चुकी है।
किसानों में नाराजगी
फसलों में तेजी से फैल रहे इस प्रकोप को लेकर किसानों में भारी चिंता और आक्रोश है। उनका आरोप है कि कई बार सूचना देने के बावजूद कृषि विभाग की कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची। किसान प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर नुकसान का आकलन और प्रभावी नियंत्रण उपाय करने की मांग कर रहे हैं।
बुवाई का बढ़ता ग्राफ
2023 2145 हेक्टेयर
2024 - 5118 हेक्टेयर
2025 - 15584 हेक्टेयर
2026 17105 हेक्टेयर
-
सहपऊ में भी बढ़ा इल्ली और हरित बाली रोग का प्रकोप
सहपऊ। क्षेत्र में भी बाजरा की फसल इल्ली की चपेट में आ गई है। हालांकि कृषि विभाग ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी की है, जिसके बाद किसानों ने कीटनाशकों का छिड़काव शुरू किया, लेकिन इनसे कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
किसानों को उम्मीद थी कि बारिश होने से यह रोग स्वत: समाप्त हो जाएगा, लेकिन बृहस्पतिवार रात हुई हल्की बूंदाबांदी और तेज आंधी ने राहत देने के बजाय बची-कुची फसल को भी गिराकर भारी नुकसान पहुंचाया है। क्षेत्र में लगभग 1000 बीघा में बाजरा की फसल खड़ी है। गर्मी के दिनों में ज्वार (पशुओं का चारा) की फसल में भी एक विशेष कीड़ा प्रवेश कर रहा है, जिसे खाने से दुधारू पशु बीमार हो रहे हैं और कुछ की मौत भी हो चुकी है। संवाद
-
अत्यधिक तापमान से फैलता है रोग
सहायक विकास खंड अधिकारी (कृषि) मुरारीलाल ने बताया कि बाजरा की फसल में आया यह रोग एक प्रकार का फंगस है, जिसे हरित बाली रोग या इल्ली रोग भी कहा जाता है। इसमें बालियों में दानों के स्थान पर हरे रंग का फंगस उग आता है। वातावरण में अत्यधिक तापमान होने के कारण यह रोग बाजरा में फैलता है। किसानों को कीटनाशकों के छिड़काव के साथ खेत का तापमान (नमी) ठीक रखने के उपाय करने चाहिए।
-
कीट और रोग के निदान के लिए किसानों को एडवाइजरी जारी की गई है। किसान इनके निदान के लिए कीटनाशक का प्रयोग कर सकते हैं।
-निखिल देव तिवारी, जिला कृषि अधिकारी