तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने जांच आख्या में अवर अभियंता (जलकल) हर्षवर्धन द्वारा स्वार्थवश अनुचित लाभ पाने के उद्देश्य से यह सब करना पाया गया। निविदा पत्रावलियों में स्वयं के स्तर से साजिशन धरोहर राशि के रूप में फर्जी एफडीआर लगवाया जाना पाया गया। विभिन्न प्रतिभागी फर्मों की धरोहर राशि की एफडीआर बिना अनुमोदन के वापस देना भी पाया गया।
इससे पहले वित्तीय वर्ष 2023-24 में हैंडपंप स्थापना संबंधी माप पुस्तिकाओं को बदलवाकर 5,30,586 रुपये का अधिक भुगतान कराने की अनियमितता की गई थी। उक्त मामले में अवर अभियंता हर्षवर्धन को निलंबित किया गया था। उनके विरुद्ध एफआईआर करने की संस्तुति की गई थी।