जैसे ही कार नदी में पलटी और उसकी छत पानी में चली गई, वैसे ही मंजू ने कार में बैठे बच्चों व सभी से कहा कि मुंह को पानी से बाहर निकालो, जिससे कि हम बच सकें, लेकिन मंजू की तमाम कोशिशें भी अपने पति नगेंद्र के साथ मासूमों व अपनी देवरानी को नहीं बचा सकीं। इस बात को याद कर करके मंजू बार-बार बेहोश हो रही हैं।
मंजू अपने पति के साथ कार में आगे की सीट पर ही बैठी थीं। कार ने पलटा खाया तो उसका आगे का हिस्सा सीधे पानी में जाकर लगा, जिससे नगेंद्र के सिर में भी चोट आ गई। इसके बाद कार धीरे-धीरे पानी में डूबने लगी। कार उलटी हो गई। मंजू ने बताया कि पीछे की सीट पर बैठे बच्चे और पूनम कार के पलटते ही नीचे की ओर दब गए। मैंने सभी से कार में खड़े होकर पानी से मुंह बाहर रखने के लिए कहा, जिससे गंदा पानी अंदर न जा सके। इसके साथ ही लगातार सबकी जान बचाने के लिए पति के मोबाइल से नंबर मिलाए।
एक घंटे तक जान बचाने की कोशिश करते रहे कार में बंद लोग
गाड़ी में सेंट्रल लॉक लगा हुआ था, जैसे ही गाड़ी नदी के पानी में गिरकर पलटी, वैसे ही पूरी तरह से ऑटोमेटिक लॉक हो गई और उसमें पानी भरने लगा। करीब एक घंटे तक उसमें सवार लोगों ने खुद को बचाने की कोशिश की। गाड़ी में पानी पूरी तरह से भर चुका था, इसमें सवार लोग खड़े हो गए और पानी से बचने की कोशिश करने लगे। बचाव अभियान शुरू होने तक सभी ने खड़े रहकर ही खुद को बचाया।