हाथरस। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड मीतई से आगरा तक करीब 37 किमी लंबी हाईटेंशन लाइन को अत्याधुनिक हाई टेंपरेचर लो सैग (एचटीएलएस) तकनीक में बदलने की तैयारी कर रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य बढ़ती बिजली मांग के अनुरूप ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ाना और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
यह काम होने के बाद हाथरस के अलावा पड़ोसी जिलों के निकटवर्ती क्षेत्रों के लाखों उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में बिजली कटौती और ओवरलोडिंग की समस्या से राहत मिलेगी। स्थानीय स्तर पर इस परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस पर लगभग 26 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।
प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद विशेषज्ञ कंपनियों द्वारा कार्य शुरू किया जाएगा। अधिशासी अभियंता ट्रांसमिशन होपेंद्र कुमार का कहना है कि यह परियोजना केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा नहीं करेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में बढ़ने वाली बिजली मांग के लिए भी ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत बनाएगी।
यह है एचटीएलएस तकनीक
हाई टेंपरेचर लो सैग (एचटीएलएस) ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिसमें तार अधिक तापमान पर भी कम लटकते हैं। सामान्य हाईटेंशन लाइनों में गर्मी बढ़ने पर तार फैलकर नीचे झुक जाते हैं, जिससे ट्रिपिंग, फॉल्ट और आपूर्ति बाधित होने की संभावना बढ़ जाती है। नई तकनीक से यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
उपभोक्ताओं को यह होगा फायदा
नई लाइन लगने के बाद मौजूदा बिजली के खंभों का ही उपयोग किया जाएगा, लेकिन उन्हीं पर पहले की तुलना में दोगुने से अधिक बिजली ट्रांसमिट की जा सकेगी। इससे बढ़ते लोड के बावजूद लाइन पर दबाव कम रहेगा और ओवरलोडिंग के कारण होने वाली ट्रिपिंग व फॉल्ट में कमी आएगी। विशेषकर भीषण गर्मी के दौरान बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर बनी रहेगी।
इसलिए जरूरी है परियोजना
वर्तमान में गर्मियों के दौरान इस लाइन पर प्रतिदिन करीब 300 मेगावाट तक लोड दर्ज किया जाता है। मौजूदा लाइन की क्षमता लगभग 450 मेगावाट तक है, लेकिन एचटीएलएस तकनीक अपनाने के बाद इसकी वहन क्षमता लगभग दोगुनी हो जाएगी। इससे भविष्य में बढ़ती बिजली मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सकेगा। हाल ही में गर्मी के चलते 14 जुलाई को अधिकतम मांग 284 मेगावाट पहुंच गई थी, जबकि इससे पहले दो व तीन जुलाई में बारिश के कारण मौसम ठंडा होने पर यह मांग करीब 180 मेगावाट रह गई थी। जिले में अब तक रिकॉर्ड मांग 331 मेगावॉट दर्ज की गई है।
विद्युत आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था
लाइन बदलने के दौरान बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित नहीं होगी। विभाग ने इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की योजना बनाई है। कार्य अवधि में जिले के पांच प्रमुख बिजलीघरों को मथुरा के मांट और अलीगढ़ के खैर ग्रिड से बिजली उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उपभोक्ताओं को न्यूनतम असुविधा हो।
30 से 40 दिन में पूरा होगा काम
प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद विशेषज्ञ कंपनियों द्वारा इस काम को पूरा करने में करीब 30 से 40 दिनों का समय लगेगा। बताया गया कि एक अच्छी कंपनी द्वारा औसतन प्रतिदिन 1 से 2 किलोमीटर नई लाइन बिछाई जाती है। ऐसे में करीब 37 किलोमीटर में 15 से 20 दिन का समय लगना चाहिए, लेकिन अगर अधिकतम भी मानें तो 30 से 40 दिन में काम पूरा कर लिया जाना चाहिए। इस दौरान अलीगढ़ के खैर व मथुरा के माट से बिजली आपूर्ति दी जाएगी। दोनों की लाइन हाथरस जनपद में मौजूद हैं। इसका प्रयोग आपातकालीन समय में बिजली लेने व देने के लिए किया जाता है।
ये हैं जिले के सात बड़े सब स्टेशन
-मीतई 220 केवी
-सादाबाद 132 केवी
-बामौली 132 केवी
-सासनी 132 केवी
-ओढ़पुरा 132 केवी
-हसायन 132 केवी (आपूर्ति अलीगढ़ से)
-सिकंदराराऊ 220 केवी (आपूर्ति अलीगढ़ से)
जिले में विद्युत व्यवस्था पर एक नजर
07 विद्युत सब स्टेशन हैं जिले में
65 बिजलीघर हैं जिले में
2.77 लाख कुल उपभोक्ता हैं जिले में
1.45 लाख उपभोक्ता स्मार्ट मीटर से लेस