मन कक्ष में भी सुविधा का अभाव
मानसिक रोग विभाग के नाम जिला अस्पताल में केवल दो कमरे का मन कक्ष है, जबकि ओपीडी, साइकोथेरेप्यूटिक रूम, ईसीटी और मेडिकल थैरेपी यूनिट, विभागीय कार्यालय आदि की व्यवस्था होनी चाहिए। माहौल भी शांतिपूर्ण व तनाव रहित होना चाहिए, लेकिन यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं।
केवल काउंसिलिंग तक सीमित
मन कक्ष की सेवाएं केवल काउंंसिलिंग तक सीमित हैं। मनोचिकित्सा संबंधी उपकरण जैसे ईईजी आदि हैं, लेकिन चिकित्सक व रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में इनका प्रयोग नहीं होता। मन कक्ष में रोजाना औसतन 20 से 25 मरीजों की ओपीडी है। इनमें 60 फीसदी फॉलोअप मरीज होते हैं। तीन दिन ओपीडी और तीन दिन आउटरीच कार्यक्रम चलते हैं, जिसके तहत क्षेत्र में जाकर मनोरोग के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। इस साल स्कूल-कॉलेजों में भी कोई कार्यक्रम नहीं हुए हैं।
काउंसिलिंग लेने वालों में युवा अधिक
नैदानिक मनोविज्ञानिक डाॅ. ललित कुमार ने बताया कि काउंसिलिंग लेने वालों में युवाओं की संख्या अधिक हैं। अवसाद में आने के प्रमुख कारण बेहतर कॅरिअर की आस व अकेलापन है। इस साल अवसाद से ग्रसित दो ऐसे युवा आए, जो आत्महत्या की कोशिश कर चुके थे। इनमें से एक युवती ने परिवार का ध्यान आकर्षित करने के लिए कई बार नस काटी थी। हालांकि चार से पांच बार की काउंसिलिंग में दोनों काफी हद तक ठीक हैं।
इन्होंने दिखाई नादानी.. गंवा दी जान
- 29 दिसंबर 2025 प्रेमी के शादी से इन्कार करने पर शहर की एक युवती ने पहले वीडियो जारी किया और फिर उसके बाद आत्महत्या कर ली। मां व मौसी के करीब होने के बाद भी युवती ने अपनी परेशानी उनसे साझा नहीं की।
- 2 जनवरी 2026 को मुरसान के गांव में नौवीं कक्षा के छात्र ने महज मां के डांटने पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
- 11 जनवरी 2026 को 15 वर्षीय किशोर ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों को पता ही नहीं चल सका कि उनके बेटे ने यह कदम क्यों उठाया।