शासन स्तर से बजट मिलने के बाद भी जिले में दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग पाने के लिए भटकना पड़ रहा है। शासन की ओर से करीब पांच माह पूर्व बजट जारी कर दिया गया है, लेकिन अभी तक विभाग की ओर से कृत्रिम अंगों को खरीदने के लिए संस्था के चयन प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी है। वर्तमान में करीब 225 दिव्यांगों के आवेदन विभाग में लंबित पड़े हैं।
जिले में दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जाने के लिए शासन की ओर से 23 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। यह बजट करीब आठ माह पूर्व विभाग को उपलब्ध करा दिया गया, जिससे पूरे वित्तीय वर्ष में दिव्यांगों को कृत्रिम अंग समय पर उपलब्ध कराए जा सकें, लेकिन अफसोस की बात है कि बजट मिलने के बाद भी दिव्यांग कृत्रिम अंग पाने के लिए कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
225 आवेदनकर्ता करीब सात माह से विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक इन दिव्यांगों को कृत्रिम अंग मुहैया नहीं हो सके हैं। आलम यह है कि बजट आने के बाद अभी तक विभाग की ओर से टेंडर प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए क्रय संस्था को चयनित नहीं किया गया है। इस कारण अभी तक कृत्रिम अंगों की खरीद नहीं हो सकी है। कृत्रिम अंगों की खरीद न होने के कारण बजट कार्यालय में पड़ा हुआ है। दिव्यांग इधर से उधर भटक रहे हैं।
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शासन ने दिव्यांगजन अधिकारी को दी विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि
हाथरस। प्रमुख सचिव सुभाषचंद्र शर्मा ने पत्र के जरिए कहा है कि 12 दिसंबर को हुई समीक्षा में पाया कि जिला दिव्यांगजन अधिकारी ने अभी तक कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण की बिड ही प्रसारित नहीं की है। बार-बार सचेत किए जाने के बावजूद उनके स्तर से इस कार्य में लगातार विलंब किया जा रहा है, जबकि वित्तीय वर्ष के समापन में कुछ माह का ही समय शेष हैं, जिससे जिले के पात्र दिव्यांगजन योजना से लभान्वित होने से वंचित रह सकते हैं। शासकीय निर्देशों की अवहेलना करने के लिए जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी व प्रभारी जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी स्मृति गौतम को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।
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पैर से दिव्यांग हूं। कई महीने पहले आवेदन किया था, लेकिन अभी तक उपकरण नहीं मिले हैं। कई बार कार्यालय के चक्कर लगा चुकी हूं।
-शीला निवासी नयावास
आवेदन करने के बाद सहायक उपकरण के लिए कई बार चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। कह देते हैं कि जब सूचना पहुंच जाएगी, तब लेने के लिए आना है।
-सुभाष दिवाकर, सोखना।
तीन बार बिड डाली है, लेकिन क्रय संस्था फाइनल नहीं हो सकी है। अब संस्था के चयन की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही क्रय संस्था निर्धारित हो जाएगी। करीब 225 आवेदन विभाग के पास लंबित हैं।
-स्मृति गौतम, जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी ।