हाथरस। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर बसपा और विरोधी मोर्चे के बीच रस्साकसी जारी है। विरोधी मोर्चे के दांव के बाद अब बसपा खेमा बैकफुट पर आ गया है। जिला पंचायत के 25 में से 15 सदस्यों का समर्थन खोने के बाद अध्यक्ष गुट के सामने अविश्वास प्रस्ताव पेश होने तक बहुमत का जुगाड़ करने की चुनौती है। बसपाइयों ने बहुमत के लिए अब पूरा जोर लगा दिया है।
बसपा खेमे के सामने न केवल अपने रूठे सदस्यों को साधने की चुनौती है, बल्कि विरोधी मोर्चे के सदस्यों में भी तोड़फोड़ करना उसके लिए आसान नहीं होगा। सूत्र बताते हैं कि अध्यक्ष खेमे के दूत इन सदस्यों से बराबर संपर्क बनाए हुए हैं।
उन्हें साम, दाम, दंड, भेद, किसी भी तरह अपने पालेे में खींचने के लिए जोर लगाए हुए हैं। गौरतलब है कि जिला पंचायत चुनाव में 13 बसपा समर्थित सदस्य जीतकर आए थे, जबकि चार भाजपा, चार सपा, एक रालोद और दो निर्दलीय सदस्य हैं।
इस तरह बसपा को खुद ही इस चुनाव में बहुमत मिला था, लेकिन अध्यक्ष के चुनाव तक बसपा के लिए बहुमत सहेजना मुश्किल पड़ गया और तत्कालीन सत्ताधारी सपा की जिलाध्यक्ष के खिलाफ पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय महज एक वोट से ही चुनाव जीत पाए थे और वो भी बेहद कश्मकश के बाद। कुल मिलाकर हालात ऐसे हैं मानो बसपा सत्ताधारी हो और सत्ताधारी भाजपा समेत बाकी पार्टियां विपक्ष।
25 में से 15 सदस्यों का समर्थन खोने के बावजूद बसपा खेमा हार मानने को तैयार नहीं है। अध्यक्ष का रुतबा बरकरार रखने की खातिर इस खेमे के नेता अब अपना ‘ब्रह्मास्त्र’ चलाने की तैयारी में जुट गए हैं। सूत्र बताते हैं कि बसपाई दिग्गज शपथ पत्र सौंपने वाले सदस्यों से संपर्क बनाए हुए हैं और जल्द ही कोई ऐसा धमाका करने की तैयारी में है, जिससे विपक्षी मोर्चे के अरमानों को झटका दिया जा सके।
उनकी पूरी कोशिश यही है कि किसी भी तरह यह सदस्य मान जाएं और वह भी एक दिन डीएम के सामने अपने समर्थन में बहुमत से ज्यादा संख्या में जिला पंचायत सदस्यों की लॉबिंग कराके विपक्ष के मंसूबों पर पानी फेर दें, ताकि अविश्वास प्रस्ताव की नौबत ही नहीं आए।
बसपा खेमे की सक्रियता से विरोधी मोर्चे की चुनौती भी बढ़ गई है। विरोधी मोर्चे के नेताओं को यह चिंता सता रही है कि अविश्वास प्रस्ताव पेश होने तक इन सदस्यों को कैसे साधकर रखा जाए। लिहाजा ज्यादातर सदस्यों को अपने लोगों की सुरक्षा के बीच रखा जा रहा है। उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
उनसे मिलने-जुलने वालों का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है, लेकिन विरोधी मोर्चे की चिंता यह है कि आखिर कब तक वह यह सब कर पाएंगे। उन्हें तो उम्मीद थी कि शपथ पत्र मिलने के तुरंत बाद डीएम अविश्वास प्रस्ताव के लिए तारीख तय कर देेंगे, लेकिन डीएम ने अभी तक अपने पत्ते ही नहीं खोले हैं। ऐसे में विरोधियों की बेचैनी बढ़ना भी लाजिमी है।