जलभराव के बीच बने मकान हो रहे जर्जर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो हाथरस
हाथरस। नगर पालिका प्रशासन समय रहते चेत जाता तो नगला तुंदला में मकान गिरने के बाद मां, बेटी गंभीर रूप से घायल नहीं होते। यदि अब भी नगर पालिका गंभीर हो जाए तो और हादसे होने से बच सकते हैं। नगला तुंदला से पानी निकलना तो दूर आसपास के क्षेत्रों का गंदा पानी यहां एकत्रित होकर घरों में घुस रहा है। तीन मकान और गिरासू हालत में हैं और कभी भी गिर सकते हैं। लोग घर के बाहर भी नहीं रह सकते, क्योंकि चारों तरफ गंदा पानी भरा हुआ है।
कोतवाली क्षेत्र के नगला तुंदला में जलभराव के चलते लगभग एक दर्जन से अधिक मकान जर्जर अवस्था में पहुंच गए हैं। सोमवार की देर रात नगला तुंदला निवासी बबलू का मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान गिरने से मलबे में बबलू की पत्नी सन्नो और 12 साल की पुत्री सना दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए। मकान गिरने की जानकारी जब आसपास के लोगों को लगी तो वह भी घरों से निकल आए और राहत कार्य में जुट गए। जलभराव के बीच ही लोगों ने मलबा को हटाया और घायल मां-बेटी को बाहर निकाला। परिवार के लोग उन्हें जिला अस्पताल लेकर आए जहां उनका उपचार जारी है। सन्ना के कमर और सना के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। बबलू के घर के निकट ही सोहित पुत्र आमीन, अफसर पुत्र सेंपिल, यूनिस पुत्र गफ्फार सहित लगभग एक दर्जन मकान जलभराव से जर्जर हो चुके हैं। मकानों की नींव बैठ गई हैं। पत्थर उखड़ने लगे हैं। दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। युनूस का कहना था कि मकान कब गिर जाए कहां नहीं जा सकता। मकान के चारों तरफ गंदा पानी भरा हुआ है। घर में नहीं रहेंगे तो कहां रहेंगे। अब जो भी होगा खुदा पर छोड़ दिया है। हर कोई नगर पालिका के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को कोस रहा था। लोगों में नगर पालिका अधिकारियाें के प्रति भारी रोष बना हुआ है।